नई दिल्ली : 6 / मई / 2026 : नरेंद्र मोदी ने निस्वार्थ सेवा और करुणा की भावना को प्रोत्साहित करते हुए एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। उन्होंने इस सुभाषित के माध्यम से समाज में परोपकार, दया और सेवा के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि निस्वार्थ सेवा ही सच्चे मानव धर्म का आधार है और करुणा वह शक्ति है, जो समाज को जोड़कर रखती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में दूसरों की मदद करने और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील रहने का संकल्प लें।

उन्होंने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि भारतीय संस्कृति में सदैव “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना रही है, जिसमें पूरे विश्व को एक परिवार माना गया है। इस सुभाषित के माध्यम से उन्होंने इसी विचार को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
प्रधानमंत्री के इस संदेश को सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना मिल रही है। लोगों ने इसे प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे संदेश समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सांस्कृतिक और नैतिक संदेश युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने में सहायक होते हैं।
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