दुष्यंत पचौरी , हाथरस
हाथरस : 7 / मई / 2026 : कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में 4 मई से 6 मई 2026 तक “मृदा स्वास्थ्य के लिए हरी खाद का महत्व” विषय पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन केवीके प्रभारी डॉ. एस.आर. सिंह के निर्देशन में किया गया, जिसका उद्देश्य किसानों को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने एवं रासायनिक खादों के कम उपयोग के प्रति जागरूक करना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ के रूप में डॉ. बलवीर सिंह एवं डॉ. आकांक्षा ने किसानों को हरी खाद के महत्व और उसके लाभों की विस्तृत जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की जैविक शक्ति कमजोर हो रही है, जिसे हरी खाद के प्रयोग से पुनः बेहतर बनाया जा सकता है।

डॉ. बलवीर सिंह ने कहा कि ढैंचा और सनई जैसी हरी खादें मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की पूर्ति करती हैं तथा मिट्टी की जलधारण क्षमता और संरचना को भी मजबूत बनाती हैं। वहीं डॉ. आकांक्षा ने किसानों को हरी खाद की खेती, उसे खेत में पलटने के उचित समय और उससे मिलने वाले दीर्घकालिक आर्थिक लाभों के बारे में जानकारी दी।
तीन दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। किसानों ने मिट्टी की सेहत सुधारने और जैविक तरीकों को अपनाने का संकल्प भी लिया।
![]()
