नई दिल्ली : 2 / जुलाई / 2026 : कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले को जंगली धान के संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्राधिकरण की ‘जंगली धान (ओरिज़ा रूफ़ीपोगोन) के यथास्थान संरक्षण एवं प्रबंधन’ परियोजना के तहत असम के जिले के बोरजुली क्षेत्र को द्वारा ‘जैव विविधता धरोहर स्थल’ के रूप में अधिसूचित किया गया है।
यह परियोजना वर्ष 2022 से द्वारा के सहयोग से संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य जंगली धान की दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण, उनके जर्मप्लाज्म का संग्रहण तथा उनकी विशेषताओं का वैज्ञानिक अध्ययन करना है।

परियोजना से जुड़ी वैज्ञानिकों की टीम ने एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से मुलाकात कर उन्हें परियोजना की प्रमुख उपलब्धियों से अवगत कराया।
इस अवसर पर डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने कहा कि जंगली धान की प्रजातियां देश की अमूल्य आनुवंशिक धरोहर हैं। इनके आधार पर भविष्य में जलवायु परिवर्तन का सामना करने वाली, अधिक उपज देने वाली और बेहतर पोषण गुणवत्ता वाली धान की नई किस्में विकसित की जा सकती हैं।
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