नई दिल्ली : 16 / जुलाई / 2026 : भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की आई-ड्रोन पहल ने तपेदिक (टीबी) की जांच प्रक्रिया को अधिक तेज, सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। तेलंगाना के यादद्री-भुवनगिरी जिले में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि ड्रोन के जरिए थूक के नमूने प्रयोगशाला तक पहुंचाने से टीबी की जांच का औसत समय 15 दिन से घटकर केवल 5 दिन रह गया।
यह अध्ययन आईसीएमआर, एम्स बिबिनगर और जिला टीबी कार्यालय के सहयोग से राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत किया गया। इसमें 840 प्रतिभागियों को शामिल किया गया और पारंपरिक नमूना परिवहन प्रणाली की तुलना ड्रोन आधारित मॉडल से की गई।
अध्ययन के अनुसार, ड्रोन तकनीक अपनाने से मरीजों पर आर्थिक बोझ भी काफी कम हुआ।

जहां पहले टीबी जांच के लिए मरीजों का औसत व्यक्तिगत खर्च लगभग 9,451 रुपये था, वहीं ड्रोन आधारित व्यवस्था में यह घटकर करीब 91 रुपये रह गया। कई मरीजों को तो जांच के लिए यात्रा पर कोई खर्च ही नहीं करना पड़ा, क्योंकि वे अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही नमूना जमा कर सके।
यह व्यवस्था 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 60 उप-केंद्रों और चार टीबी इकाइयों को जोड़ने वाले हब-एंड-स्पोक नेटवर्क के माध्यम से संचालित की गई, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकीं।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि समय पर और सुलभ जांच भारत के टीबी उन्मूलन अभियान की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आई-ड्रोन पहल ने यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक भौगोलिक बाधाओं को दूर करने और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अध्ययन में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों ने भी माना कि ड्रोन आधारित परिवहन से नमूनों की डिलीवरी में देरी कम हुई, कार्यक्षमता बढ़ी और स्थानीय समुदायों ने इस तकनीक को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया। हालांकि, मौसम, भार क्षमता और प्रशिक्षण जैसी चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया, जिन पर भविष्य में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
आईसीएमआर का मानना है कि आई-ड्रोन पहल भविष्य में टीकों, दवाओं, रक्त उत्पादों और अन्य चिकित्सा नमूनों के सुरक्षित एवं त्वरित परिवहन के जरिए देश के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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