गोरखपुर : 22 / अप्रैल / 2026 : गोरखपुर सामाजिक, धार्मिक एवं राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़ी संस्था विद्वत् जनकल्याण समिति द्वारा मंगलवार, 21 अप्रैल को आद्य जगद्गुरु आदि शंकराचार्य की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।
राजेन्द्र नगर पश्चिमी स्थित संस्था कार्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां संस्था के महामंत्री पं. बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य ने शंकराचार्य जी के चित्र पर माल्यार्पण कर धूप-दीप प्रज्वलित किया और उनके विचारों एवं कृतियों को स्मरण किया।

इस अवसर पर पं. बृजेश पाण्डेय ने कहा कि आदि शंकराचार्य का जन्म बैशाख शुक्ल पक्ष पंचमी को केरल के कालडी में हुआ था। वे अद्वैत वेदांत के महान प्रतिपादक थे और उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। उन्होंने अल्पायु में ही संन्यास लेकर वेदों का गहन अध्ययन किया और मात्र 32 वर्ष की आयु में भारत के चारों दिशाओं—द्वारका, पुरी, श्रृंगेरी और बद्रीनाथ—में मठ स्थापित कर देश की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ किया।
उन्होंने बताया कि शंकराचार्य जी ने उपनिषद, भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखकर ज्ञान, भक्ति और कर्म के बीच समन्वय स्थापित किया। उनके द्वारा रचित ‘भज गोविंदम’, ‘भवानी अष्टकम’ और ‘कनकधारा स्तोत्र’ जैसे ग्रंथ आज भी श्रद्धा से पाठ किए जाते हैं।

कार्यक्रम के अंत में पं. पाण्डेय ने कहा कि शंकराचार्य जी का जीवन और उनकी कृतियां सभी सनातन धर्मावलंबियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उनके आदर्श आज भी समाज को एकता के सूत्र में बांधने का मार्ग दिखाते हैं।
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