नई दिल्ली : 14 / मई / 2026 : भारत सरकार ने देश के वस्त्र पुनर्चक्रण (टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग) उद्योग को लेकर प्रसारित कुछ मीडिया रिपोर्टों को भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है। सरकार का कहना है कि भारत वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है तथा इस दिशा में कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, हाल में कुछ अंतरराष्ट्रीय और डिजिटल मीडिया मंचों पर यह दावा किया गया था कि भारत में बड़े पैमाने पर वस्त्र कचरे का अनुचित निपटान किया जा रहा है और पुनर्चक्रण व्यवस्था कमजोर है। इन दावों का खंडन करते हुए संबंधित विभागों ने स्पष्ट किया कि देश में संगठित और असंगठित दोनों स्तरों पर वस्त्र पुनर्चक्रण का व्यापक नेटवर्क सक्रिय है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग केंद्रों में से एक है, जहां पुराने कपड़ों और वस्त्र अपशिष्ट को दोबारा उपयोग योग्य उत्पादों में बदला जाता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी प्राप्त होता है।
सरकार ने बताया कि “सर्कुलर इकोनॉमी” को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियों और तकनीकों पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसके तहत वस्त्र उद्योग में टिकाऊ उत्पादन, अपशिष्ट प्रबंधन और पुन: उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे तथ्यों की पुष्टि के बाद ही रिपोर्ट प्रकाशित करें, ताकि देश की औद्योगिक छवि और पर्यावरणीय प्रयासों को लेकर गलत संदेश न जाए।
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