नोएडा : 7 / जुलाई / 2026 : पर्यावरण संरक्षण और बढ़ती गर्मी की गंभीर चुनौती पर वरिष्ठ प्रबंधक श्याम बिहारी (BHEL, टीबीजी, नोएडा) ने अपनी कविता “पेड़, पौधे और उष्णता” के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया है।
कविता में बढ़ती गर्मी, सूखते जलस्रोत, घटते जंगल, गिरते भूजल स्तर और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों का सजीव चित्रण किया गया है। साथ ही यह बताया गया है कि यदि समय रहते वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में धरती मरुस्थल में बदल सकती है।

रचनाकार ने कविता के माध्यम से आमजन से अधिक से अधिक पेड़ लगाने, उन्हें संरक्षित रखने और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने की अपील की है। कविता का समापन भी इसी संदेश के साथ होता है कि “रोपित कर इन्हें बढ़ाओ, रखो सदैव हरित, तभी हम सभी जीव-जंतु रहेंगे प्रसन्नचित।”
यह कविता वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का प्रभावी संदेश देती है।
कविता
अभी ठीक से दोपहर भी नहीं हुआ है
पर आसमां में, गर्म तरंगों भरी हवा है
देह को झुलसा देगी, ऐसी ये तपन है
तपन से झुलसा उठा, ये सारा चमन है
सिक्त पसीने से, मनुष्य की काया है
ढूंढत सभी, पेड़ की एक घनी छाया है
सभी सूखते जलाशय एवं दरकती धरा है
भटकते जीव-जंतु, प्यास से अधमरा है।
कहीं दरकती रेत, कहीं सूखा-अकाल है
कहीं मरती फसलें और कृषक बदहाल है
दीन कृषक व्यथित है, बारिश की आस है
मरती फसलें देख, सभी जिंदगी से हताश हैं
शीतल जल और घनी छाँव की खोज में
पशु पक्षी मिल रहे हैं मौत के आगोश में
इस तपन में भी जिजीविषा दिखे तोड़ते पत्थर
कुछ रोजी के लिए, दिखे ढोते सामान सर पर
माँ ढोती ईंट, बच्चे खेलते धूप से तपते पथ पर
मानो असर नहीं है सूर्य के सितम का, उन पर
जैसे हर हाल में जिंदगी जीने की ठान रखी है
सूर्य भी जिद में, चहुंओर जला मसान रखी है।
बढ़ती आबादी और बनते नए-नए शहर
घटते नदी, नाले, कुएँ, जलाशय एवं नहर
बढ़ते कारखाने और ग्रीन-गैस का कहर
घटते जंगल, घटती बारिश एवं भूजल स्तर
प्रचंड धूप की तरंग, वीरान सी होगी धरा
सुखा देंगी अंग अंग, जीव होगा अधमरा
सूखेगी धरा की नाड़ी, गिरेगा भूजल स्तर
देखते ही देखते, ये जहां बनेगा मरुस्थल
भूजल ऊपर लाने की कोशिश तमाम होगी
तब मनुष्य की हर कोशिश नाकाम होगी
धीरे-धीरे, ये धरा हो जाएगी ऐसे स्वरुप में
जैसे थी कभी यह अपने आदिरूप में
यह होगा पेड़-पौधों के अभाव के कारण
हम हैं उनका अस्तित्व मिटाने का कारण
क्योंकि पेड़ पौधे ही वर्षा हेतु मौसम बनाते हैं
अपनी जड़ों द्वारा भूजल स्तर ऊपर लाते हैं
रोपित कर इन्हें बढ़ाओ, रखो सदैव हरित
तभी हम सभी जीव-जंतु रहेंगे प्रसन्नचित।
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