भुवनेश्वर : 8 / जुलाई / 2026 : भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग 9 जुलाई को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिसमें गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए प्राधिकरण पत्र (लेटर ऑफ ऑथराइजेशन-एलओए) व्यवस्था का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा।
कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर ‘ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026-2036)’ दस्तावेज का भी लोकार्पण किया जाएगा। समारोह में ओडिशा के राज्यपाल , मुख्यमंत्री , केंद्रीय मंत्री , केंद्रीय शिक्षा मंत्री समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहेंगे। लगभग एक हजार मछुआरे, महिला मत्स्य पालक और सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में भाग लेंगे।
नई एलओए व्यवस्था के तहत भारतीय ध्वज वाले पात्र मछली पकड़ने वाले जहाजों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में निर्धारित नियमों के अनुरूप मत्स्य पालन की अनुमति मिलेगी। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और जहाजों के पंजीकरण, निगरानी तथा आवेदन की ट्रैकिंग को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
कार्यक्रम के दौरान कई मत्स्य सहकारी समितियों और जहाज मालिकों को एलओए प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे सहकारी संस्थाओं और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों को मजबूती मिलेगी, गहरे समुद्र में उच्च मूल्य वाली मछलियों तक पहुंच आसान होगी और मछुआरों की आय में वृद्धि होगी।
‘ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन’ का उद्देश्य अगले दस वर्षों में राज्य को गहरे समुद्र में मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाना है। इसके लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे, वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन, बेहतर विपणन व्यवस्था और मूल्य संवर्धन पर विशेष जोर दिया जाएगा।
भारत सरकार के अनुसार देश के पास 11 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) है। इसके बावजूद अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां तटीय क्षेत्रों तक सीमित हैं। नई व्यवस्था के जरिए गहरे समुद्र में उपलब्ध उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के दोहन को बढ़ावा देते हुए समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह पहल समुद्री मत्स्य क्षेत्र में पारदर्शिता, डिजिटल प्रबंधन, निर्यात वृद्धि और मछुआरों की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। साथ ही यह भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ को गति देने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप जिम्मेदार समुद्री मत्स्य पालन को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
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