नई दिल्ली : 18 / जुलाई / 2026 : ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) ने किसानों और ग्रामीण नागरिकों के लिए ऋण प्रक्रिया को अधिक सरल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से आरबीआई इनोवेशन हब (RBIH) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। बैठक में डिजिटल भूमि प्रशासन और डिजिटल ऋण प्रणाली के बेहतर समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने की। इसमें आरबीआई इनोवेशन हब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साहिल किनी, मुख्य उत्पाद अधिकारी अभिषेक पोद्दार, उपाध्यक्ष अरुण सीतामराजू, सहायक महाप्रबंधक अदिति दुबे सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य विभाग की डिजिटल भूमि शासन पहल को एकीकृत ऋण इंटरफेस (ULI) से जोड़ना था, ताकि प्रमाणित डिजिटल भूमि अभिलेखों के आधार पर किसानों को सहमति-आधारित और तेज़ी से संस्थागत ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि प्रमाणित और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) तथा अन्य कृषि ऋणों की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही ऋण वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी, लेनदेन की लागत कम होगी और ऋण स्वीकृति में लगने वाला समय भी घटेगा।
इसके अलावा, एक ही भूमि के आधार पर बार-बार ऋण लेने की आशंका को रोकने के लिए बंधक सूचना प्रणाली को मजबूत करने, सामान्य डेटा मानकों को अपनाने, एपीआई की अंतरसंचालनीयता सुनिश्चित करने और यूएलपीआईएन (भू-आधार) के व्यापक उपयोग पर भी चर्चा की गई।
भूमि संसाधन विभाग ने बैठक में सुरक्षित, आधुनिक और नागरिक-केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि इससे ग्रामीण भारत में औपचारिक ऋण तक पहुंच आसान होगी और भूमि प्रशासन व्यवस्था को भी अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।
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