गाजियाबाद : 18 / अक्टूबर / 2026 : ग्राम कनावनी में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के खिलाफ किसानों का अनिश्चितकालीन धरना रविवार को 66वें दिन भी जारी रहा। दो महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद मांगों का समाधान नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
धरना स्थल पर आयोजित पंचायत में किसानों ने आंदोलन को व्यापक बनाने और आने वाले दिनों में संघर्ष तेज करने का ऐलान किया। किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक खसरा-खतौनी में उनके नाम बहाल नहीं होते, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।

पंचायत में किसानों ने आरोप लगाया कि वे पिछले 66 दिनों से अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि लगातार मांग उठाने के बावजूद उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है।
किसान नेता परवीन नागर ने पंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि कनावनी के किसान अपने हक और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। अब आंदोलन को केवल धरना स्थल तक सीमित नहीं रखा जाएगा।
आसपास के गांवों के किसानों, विभिन्न किसान संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों को आंदोलन से जोड़कर इसे व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और इसी के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
किसान नेता कैलाश नागर ने कहा कि किसानों के अनुसार, उच्च न्यायालय में अवमानना मामले के तहत प्राधिकरण और प्रशासनिक अधिकारियों को तलब किए जाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
किसानों ने आरोप लगाया कि न्यायालय की ओर से निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी जमीन से जुड़े मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से न्यायालय के आदेशों का पालन कराने और मामले का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की।
वहीं, किसान नेता लखीराम शर्मा ने कहा कि किसान अपनी जमीन के अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे। उनकी प्रमुख मांग खसरा-खतौनी में नाम बहाल करने और जमीन से जुड़े विवाद का समाधान कराने की है। उन्होंने कहा कि जब तक राजस्व अभिलेखों में किसानों के नाम बहाल नहीं होते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
पंचायत में मौजूद किसानों और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आंदोलन में आसपास के गांवों और किसान संगठनों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। आगामी रणनीति सामूहिक सहमति से तय होगी। किसानों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि पुश्तैनी जमीन, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा के लिए है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की कि न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करते हुए जमीन से संबंधित मामले में स्पष्ट कार्रवाई की जाए और खसरा-खतौनी में उनके नाम बहाल किए जाएं। पंचायत में किसानों ने एकजुट होकर संकल्प दोहराया कि मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “अब आंदोलन रुकेगा नहीं, बल्कि और मजबूत होगा। नाम बहाली तक घर वापसी नहीं।”
धरना स्थल पर चतर सिंह नागर, जगदीश शर्मा, श्रीचंद नागर, मथन सिंह नागर, जयपाल नागर, राजेन्द्र नागर, श्याम सिंह अधाना, दीपक महाराज सिंह नागर, सतीश नागर, मनीराम नागर, कुलदीप अधाना, अमित कसाना सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।
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Author: krjnews
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