बुलंदशहर : 6 / अगस्त / 2025 : उत्तर प्रदेश सरकार के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी का एक आदेश अब प्रदेश के अफसरों के गले की हड्डी बन गया है। अफसरों के सामने स्थिति अब यह हो गई है कि यह आदेश न तो उगलते बन रहा है और न ही निगलते बन रहा है। क्योंकि इस आदेश का अनुपालन जो भी अफसर करेगा, उसे एनजीटी का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली-अलीगढ़ नेशनल हाइवे पर खुर्जा के समीप परम् डेयरी की 7 हेक्टेयर जमीन है। इसमें से 3 हेक्टेयर जमीन ग्रीन बेल्ट के अंतर्गत आती है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के अनुसार ग्रीन बेल्ट में सिर्फ एग्रीकल्चर और फार्म हाउस का ही निर्माण किया जा सकता है। एनजीटी के आदेशानुसार यहां कॉमर्शियल और रेजिडेंशियल लैंड यूज नहीं किया जा सकता है। अब यही अड़चन दूर करने के लिए तत्कालीन मुख्य सचिव मनोज कुमार 18 जुलाई को बुलंदशहर आए और अफसरों को फरमान सुना गए कि ग्रीन बेल्ट इधर-उधर कीजिए। परम् डेयरी का जो मानचित्र स्वीकृत हुआ है, उसी के अनुसार निर्माण किया जाएगा। परम् डेयरी के मानचित्र को लेकर हुए विवाद की जड़ एक अफसर है, जिसकी गलती अब प्रदेश के तमाम अफसरों के लिए नासूर बन चुकी है। दरअसल, 13 अप्रैल 1998 को बुलंदशहर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद से हटने वाले आईएएस अफसर रजनीश गुप्ता ने 6 दिन पहले 7 अप्रैल 1998 को मानचित्र स्वीकृत कर दिया। एक बड़े अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आईएएस रजनीश गुप्ता ने ग्रीन बेल्ट को नजरअंदाज करते हुए परम् डेयरी के पक्ष में गलत मानचित्र स्वीकृत किया।

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