बुलंदशहर : 25 / सितम्बर / 2025 : नवरात्रि का चौथा दिन माँ कूष्माण्डा की पूजा के लिए समर्पित है। बताया जाता है कि इस दिन माँ कूष्माण्डा की पूजा करने से साधक के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। माँ कूष्माण्डा भक्तों के छोटे-छोटे प्रयासों से भी प्रसन्न हो जाती हैं और उन्हें आयु, यश, बल और आरोग्य का आशीर्वाद देती हैं। माँ कूष्माण्डा का स्वरूप अत्यंत कांतिमान और ओजस्वी है। वह सृष्टि की रचनाकार हैं और उनकी पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है। माँ कूष्माण्डा की पूजा करने से भक्तों को शक्ति, साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। नवरात्रियों मे मंदिर में मां की पूजा अर्चना करने के लिए श्रद्धालुओं का सुबह से ही तांता लगा हुआ है सुबह से ही मंदिर में घंटा घड़ियाल की आवाज चारों तरफ गूंजने लगी। माता रानी के जयकारों से समस्त वातावरण गुंजायमान हो उठा। नवरत्रियो मे श्रद्धालुओं ने मां को पुष्प, फल, नारियल और श्रृंगार आदि अर्पित किये जाते है मंदिर परिसर में सामूहिक भजन कीर्तन आयोजन किया जाता है। सभी मंदिरो मे सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सुरक्षा गार्ड निगरानी रखने के लिए रखे जाते हैं जिससे भक्तों को सुविधापूर्वक दर्शन हो सके। माता को छप्पन भोग लगाया जाता है जो पूरे दिन भक्तों में वितरित किया जाता है नवरात्रि का त्योहार माँ दुर्गा की पूजा और आराधना के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार नारी शक्ति और देवी दुर्गा की महिमा का प्रतीक है। नवरात्रि के दौरान, भक्त माँ दुर्गा की पूजा करते हैं और उनकी कृपा से जीवन की बाधाओं को दूर करने का प्रयास करते हैं। प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माँ कूष्माण्डा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उनकी पूजा करें। माँ को लाल रंग के फूल और मालाएं अर्पित करें। और माँ का सुन्दर सा श्रृंगार किया जाता है। माँ को मालपुए का भोग लगाया जाता है जो माँ कूष्माण्डा को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि का पालन अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीकों से किया जाता है। कुछ जगहों पर गरबा और डांडिया रास के आयोजन किए जाते हैं, जबकि अन्य जगहों पर माँ दुर्गा की पूजा और आरती के आयोजन होते हैं। नवरात्रि का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है और यह देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति का प्रतीक है।
![]()
