नई दिल्ली : 25 / अप्रैल / 2026 : देश की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी को उस समय करारा झटका लगा जब राघव चड्ढा के नेतृत्व में 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इसे AAP के इतिहास की सबसे बड़ी टूट माना जा रहा है।
पार्टी छोड़ने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं राघव चड्ढा , अशोक मित्तल , संदीप पाठक , स्वाति मालीवाल , हरभजन सिंह , विक्रमजीत सिंह सहनी , राजेंद्र गुप्ता इन सभी नेताओं के एक साथ इस्तीफे से पार्टी की स्थिति कमजोर हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के अंदर लंबे समय से मतभेद और असंतोष चल रहा था।
नेताओं का आरोप है कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। नेतृत्व में संवाद की कमी है। फैसले सीमित लोगों तक सिमट गए हैं और वहीं, पार्टी नेतृत्व इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है।
राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद थे, जिनमें से 7 के एक साथ जाने से यह संख्या दो-तिहाई से अधिक हो गई। ऐसे में इन नेताओं पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा, जिससे उनका दूसरी पार्टी में जाना आसान हो गया।
राज्यसभा में AAP की ताकत घटकर बहुत कम रह गई है। वहीं दूसरी और बीजेपी की स्थिति और मजबूत हो गई। आने वाले चुनावों, खासकर पंजाब और दिल्ली की राजनीति पर असर पड़ सकता है।
आम आदमी पार्टी ने इसे “ऑपरेशन लोटस” बताते हुए बीजेपी पर तोड़फोड़ का आरोप लगाया
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि यह नेताओं का व्यक्तिगत और स्वैच्छिक निर्णय है।
AAP में यह टूट केवल नेताओं का इस्तीफा नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर गहरे संकट और नेतृत्व पर उठ रहे सवालों का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इस चुनौती से कैसे उबरती है और भारतीय राजनीति में इसका क्या असर पड़ता है।
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