नई दिल्ली : 19 / मई / 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धरती माता द्वारा समस्त मानवता को एक ही परिवार के सदस्य के रूप में स्वीकारने की भारतीय भावना को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति सदियों से “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना को आत्मसात करती आई है, जिसमें पूरी मानवता को एक परिवार माना गया है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएं विश्व बंधुत्व, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने संस्कृत सुभाषितम् के माध्यम से यह संदेश दिया कि पृथ्वी पर रहने वाले सभी लोग एक ही परिवार के सदस्य हैं और सभी के प्रति सम्मान, करुणा एवं सहयोग की भावना रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में यह विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है, जब दुनिया को शांति, एकता और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि भारत सदैव मानवता के कल्याण की दिशा में कार्य करता रहा है।
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Author: krjnews
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