शिकारपुर : 25 / सितम्बर / 2026 : शिकारपुर तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अदालत से अपने पक्ष में फैसला आने के बाद भी एक मजदूर को अपनी जमीन पर कब्जा पाने के लिए तहसील अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
पीड़ित का आरोप है कि एसडीएम न्यायालय से कब्जा दिलाने के स्पष्ट आदेश जारी होने के बावजूद राजस्व अधिकारी मामले में लगातार टालमटोल कर रहे हैं।

मामला ग्राम जखैता से जुड़ा है। कुतुबपुर निवासी मजदूर भोले सिंह का दावा है कि ग्राम जखैता स्थित खेत संख्या 568 की जमीन पर कुछ लोगों ने लंबे समय से कब्जा कर रखा है।
इस संबंध में पीड़ित ने एसडीएम न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद फैसला उसके पक्ष में आया। पीड़ित के अनुसार न्यायालय की ओर से संबंधित कानूनगो और राजस्व टीम को जमीन पर कब्जा दिलाने के आदेश भी जारी किए गए।
पीड़ित का कहना है कि गत 3 सितंबर 2026 को भी एसडीएम की ओर से कब्जा दिलाने के संबंध में आदेश जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद अभी तक उसे जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया गया है। भोले सिंह का आरोप है कि कानूनगो, राजस्व निरीक्षक प्रदीप कुमार मन्नाडे और लेखपाल नरेंद्र कुमार द्वारा उसे बार-बार कब्जा दिलाने की तारीख बताई जाती है, लेकिन मौके पर कार्रवाई नहीं की जाती।
शुक्रवार को भी पीड़ित अपने परिवार के साथ अधिकारियों से मिलने तहसील पहुंचा। उसका आरोप है कि अधिकारियों ने उसकी समस्या को गंभीरता से नहीं सुना। पीड़ित के मुताबिक वह अब तक इस मामले में करीब 1.50 लाख रुपये खर्च कर चुका है।
मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले भोले सिंह का कहना है कि लगातार तहसील के चक्कर लगाने के कारण वह आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हो चुका है।
पीड़ित ने अधिकारियों से जल्द जमीन पर कब्जा दिलाए जाने की मांग की है। साथ ही उसने चेतावनी दी है कि यदि उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होगा। पीड़ित की इस चेतावनी के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
मामले में राजस्व अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि एसडीएम न्यायालय के आदेशों के बावजूद कब्जा न मिलने के आरोपों पर तहसील प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित को उसकी जमीन पर कब्जा कब तक दिलाया जाता है।
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Author: krjnews
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