26 / सितम्बर / 2025 : नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और उन्हें पार्वती के रूप में पूजा जाता है। इस दिन भक्त स्कंदमाता की पूजा करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। स्कंदमाता को ज्ञान और विद्या की देवी माना जाता है। उनकी पूजा करने से भक्तों को ज्ञान, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। स्कंदमाता की पूजा विशेष रूप से छात्रों और विद्वानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। स्कंदमाता का श्रृंगार करने के लिए विभिन्न सामग्री का उपयोग किया जाता है, जैसे कि: स्कंदमाता को लाल रंग प्रिय है, इसलिए उनकी पूजा में लाल रंग की चुनरी का उपयोग किया जाता है। स्कंदमाता के माथे पर बिंदी और आंखों में काजल लगाया जाता है। स्कंदमाता के श्रृंगार के लिए एक विशेष किट का उपयोग किया जा सकता है, जिसमें विभिन्न श्रृंगार सामग्री जैसे कि बिंदी, काजल, मेहंदी, और नोज रिंग शामिल होते हैं।स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को ज्ञान, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। यह पूजा विशेष रूप से छात्रों और विद्वानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती है। स्कंदमाता को फल और मिठाइयां अर्पित की जा सकती हैं।

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Author: krjnews
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