नवरात्रि के छठे दिन कात्यायनी माता की पूजा की जाती है। कात्यायनी माता को देवी दुर्गा का छठा स्वरूप माना जाता है। कात्यायनी माता को प्रेम और आकर्षण की देवी माना जाता है। उनकी पूजा करने से भक्तों को प्रेम, सौंदर्य और आकर्षण की प्राप्ति होती है। कात्यायनी माता की पूजा विशेष रूप से विवाहित जीवन में सुख और समृद्धि के लिए की जाती है। कात्यायनी माता का जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था, इसलिए उन्हें कात्यायनी कहा जाता है। कात्यायनी माता ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था, जो देवताओं और मानवों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ था। कात्यायनी माता की पूजा करने के लिए लाल रंग की चुनरी ,
लाल फूल . धूप , दीप , नैवेद्य (भोग) आदि अर्पित किये जाते है। कात्यायनी माता को शहद का भोग लगाया जाता है। शहद को प्रेम और आकर्षण का प्रतीक माना जाता है। कात्यायनी माता का श्रृंगार करने के लिए लाल रंग की चुनरी , माथे पर बिंदी , आंखों में काजल , नाक में नथनी ,गले में हार आदि का उपयोग किया जाता है। कात्यायनी माता की पूजा करने से भक्तों को प्रेम, सौंदर्य और आकर्षण की प्राप्ति होती है। यह पूजा विशेष रूप से विवाहित जीवन में सुख और समृद्धि के लिए की जाती है।

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Author: krjnews
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