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ककोड़ पुलिस और साइबर क्राइम टीम की संयुक्त कार्रवाई, चार खातों से करीब 23 लाख रुपये की ठगी का खुलासा

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ककोड़ : 28 / अगस्त / 2026 :  साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत ककोड़ पुलिस और साइबर क्राइम टीम को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त टीम ने बैंक खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम मंगवाने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी साइबर ठगों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे और इसके बदले कमीशन लेते थे।

पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों की पहचान प्रदीप, प्रिंस और अंकित के रूप में हुई है। आरोप है कि तीनों आरोपी साइबर ठगी करने वाले गिरोह के संपर्क में थे। वे अपने बैंक खातों की जानकारी साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे, जिसके बाद ठगी से हासिल रकम इन खातों में मंगाई जाती थी। इसके एवज में आरोपियों को कमीशन दिया जाता था।

जांच के दौरान पुलिस टीम को आरोपियों से जुड़े चार बैंक खातों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार इन बैंक खातों के माध्यम से साइबर ठगी की करीब 23 लाख रुपये की रकम का लेनदेन सामने आया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और खातों की भी जांच कर रही है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी बैंक खातों में आई साइबर ठगी की रकम को पुलिस की कार्रवाई और बैंक खातों पर लगने वाली रोक से बचाने के लिए USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में बदलते थे। इसके बाद रकम को आगे साइबर ठगी करने वाले लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता था। पुलिस टीम इस पूरे लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है।

पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपियों द्वारा बैंक खाते उपलब्ध कराने के पीछे कमीशन का लालच होने की जानकारी मिली है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों को बैंक खाता उपलब्ध कराना भी गंभीर अपराध है, क्योंकि ऐसे खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है।

ककोड़ पुलिस और साइबर क्राइम टीम अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही संदिग्ध बैंक खातों और उनमें हुए लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, पासबुक, चेकबुक या बैंकिंग संबंधी जानकारी उपलब्ध न कराएं। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध में होने पर खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।

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Author: krjnews

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