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प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ सेवा भावना पर दिया जोर, संस्कृत सुभाषितम् किया साझा

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नई दिल्ली : 27 / अप्रैल / 2026 : नरेंद्र मोदी ने निस्वार्थ सेवा और समर्पण की भावना को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के विकास के लिए बिना किसी स्वार्थ के सेवा करना ही सच्चा कर्तव्य है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में बताया कि भारतीय संस्कृति में सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और संस्कृत के सुभाषितों में जीवन के गहरे मूल्य छिपे होते हैं। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे इन शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएं और समाज के उत्थान में योगदान दें।

उन्होंने कहा कि निस्वार्थ सेवा से न केवल व्यक्ति का चरित्र मजबूत होता है, बल्कि देश की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभती है। प्रधानमंत्री के इस संदेश को लोगों द्वारा सराहा जा रहा है और सोशल मीडिया पर भी यह तेजी से साझा किया जा रहा है।

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Author: krjnews

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