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सीएसआईआर मुख्यालय में काव्य-पाठ से हुआ हिंदी माह का शुभारंभ

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नई दिल्ली : 3 / सितम्बर / 2026 :  वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) मुख्यालय, नई दिल्ली में हिंदी माह का शुभारंभ प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार पंकज प्रसून के काव्य-पाठ से हुआ। शांति स्वरूप भटनागर सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोता पहुंचे और सभागार पूरी तरह खचाखच भरा रहा।

कार्यक्रम में सीएसआईआर के संयुक्त सचिव महेंद्र कुमार गुप्ता एवं उप सचिव अनीता सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। पंकज प्रसून ने अपने विशिष्ट अंदाज में हास्य, व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उनकी रचनाओं ने लोगों का मनोरंजन करने के साथ-साथ सामाजिक और वैज्ञानिक विषयों पर सोचने के लिए भी प्रेरित किया।

इस दौरान पंकज प्रसून ने सीएसआईआर के संस्थापक महान वैज्ञानिक शांति स्वरूप भटनागर के साहित्यिक व्यक्तित्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भटनागर साहित्य और कविता से भी जुड़े हुए थे। उनकी कृति ‘लाजवंती’ वर्ष 1946 में प्रकाशित हुई थी, जो वर्तमान में आउट ऑफ प्रिंट है। उन्होंने सुझाव दिया कि सीएसआईआर द्वारा इस पुस्तक का पुनर्प्रकाशन कराया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनके वैज्ञानिक योगदान के साथ साहित्यिक पक्ष से भी परिचित हो सके।

हिंदी माह के अंतर्गत आयोजित काव्य-पाठ प्रतियोगिता में 25 कवियों ने प्रतिभाग किया। पंकज प्रसून और कवयित्री अर्चना द्विवेदी आर्य ने प्रतियोगिता के निर्णायक की भूमिका निभाई। संयुक्त सचिव महेंद्र कुमार गुप्ता ने पंकज प्रसून की कविताओं की सराहना करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं हंसाने के साथ-साथ सोचने के लिए भी मजबूर करती हैं। उन्होंने विज्ञान और साहित्य के इस संगम को सराहनीय बताया।

कार्यक्रम में ‘विज्ञान प्रगति’ के संपादक डॉ. मनीष मोहन गोरे भी विशेष रूप से काव्य-पाठ सुनने पहुंचे। वहीं अद्विक प्रकाशन के निदेशक अशोक गुप्ता ने सीएसआईआर से जुड़े स्थानीय कवियों को पंकज प्रसून की पुस्तक ‘सच बोलना पाप है’ भेंट की।

पंकज प्रसून पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से सीएसआईआर की प्रतिष्ठित प्रयोगशाला केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ से जुड़े हैं। उन्होंने देश-विदेश के विभिन्न मंचों पर काव्य-पाठ किया है। उन्होंने सीएसआईआर मुख्यालय में काव्य-पाठ के अनुभव को भावुक और यादगार बताते हुए कहा कि विज्ञान और कविता भले ही अलग-अलग क्षेत्र दिखाई देते हों, लेकिन इस आयोजन में दोनों एक मंच पर आकर एक-दूसरे से जुड़ गए।

कार्यक्रम को सफल बनाने में हिंदी विभाग के राजकुमार का विशेष योगदान रहा। उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित एवं आत्मीयता के साथ संभालते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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Author: krjnews

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