भारतीय साहित्य पर फिल्म बनाने के लिए फिल्मकार फिर से आगे आयें –प्रदीप सरदाना
नई दिल्ली /04 फरवरी 2026 : साहित्य समाज का मन है तो सिनेमा समाज का चेहरा। साहित्य शब्दों की विधा है तो सिनेमा दृश्य और ध्वनि की। हमारी बहुत सी साहित्यिक कृतियों पर बेहद खूबसूरत, सफल और कालजयी फिल्में बनी हैं। लेकिन यह अत्यंत दुखद है कि अब हमारे अधिकांश फिल्मकार भारतीय साहित्य पर फिल्म … Read more
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