बुलंदशहर : 28 / सितम्बर / 2026 : सिंचाई विभाग द्वारा गंगनहर का पानी काली नदी में छोड़े जाने से आसपास के क्षेत्र में किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं। फसलों के डूबने से आक्रोशित भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति के कार्यकर्ताओं और किसानों ने अधिशासी अभियंता, बुलंदशहर खंड गंगनहर के कार्यालय पर धरना शुरू कर दिया।

मामले की जानकारी मिलने पर एसडीओ धरना स्थल पर पहुंचे। किसानों की शिकायत सुनने के बाद उन्होंने तत्काल फोन पर मुंडाखेड़ा से काली नदी में छोड़े जा रहे पानी को बंद कराया। पानी बंद होने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली, लेकिन अपनी अन्य मांगों को लेकर धरना जारी रखा।
भाकियू महाशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक काली नदी की पूरी तरह सफाई नहीं हो जाती, तब तक गंगनहर का पानी नदी में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों की मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि काली नदी में पानी छोड़े जाने से हजारों बीघा फसल प्रभावित हुई है। सरकार से प्रभावित किसानों को तत्काल 25 हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा दिलाने की मांग की गई। साथ ही काली नदी की सफाई कराने और नदी के दोनों ओर करीब पांच-पांच फुट ऊंची पटरी बनाकर पौधारोपण कराने की मांग रखी गई, ताकि नदी के कटाव को रोका जा सके।
ठाकुर धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि नदी किनारे रहने वाले किसान लगातार नुकसान झेल रहे हैं। उन्होंने बिजली विभाग की कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और ऐसे में बिजली का बिल जमा करना, बच्चों की फीस देना तथा परिवार का खर्च चलाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
भाकियू महाशक्ति ने स्पष्ट किया कि यदि किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला और अन्य मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जनपद के किसानों को एकजुट कर अधिकारियों का घेराव किया जाएगा। संगठन ने कहा कि किसान अब चुप नहीं बैठेंगे और काली नदी की सफाई तथा पानी की समस्या का स्थायी समाधान होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
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Author: krjnews
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