अयोध्या : 15 / अक्टूबर / 2026 : अयोध्या के सरकारी गलियारों से एक और ‘विद्रोही’ सुगबुगाहट बाहर आ गई है! जिला सहकारी बैंक अयोध्या के कर्मचारियों ने अब प्रबंधन और बैंक सभापति की मनमानी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है।
हाल यह है कि लंबे समय से अपने वेतनमान पुनरीक्षण की फाइल दबाए बैठे अधिकारियों के रवैये से आहत होकर, बैंक कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे।
मजबूरन, सभी कर्मचारियों ने आगामी 16 अक्टूबर से हड़ताल और आंदोलन पर जाने का विधिवत नोटिस थमा दिया है!
अब ज़रा इस पूरे सहकारी ‘खेल’ और प्रबंधन की कार्यप्रणाली की कलाई देखिए:
वेतनमान का हक, और अफसरों की टालमटोल!
जब पूरे सूबे में महंगाई आसमान छू रही है और हर महकमे में कर्मचारियों के वेतनमान का पुनरीक्षण समय पर हो रहा है, तब अयोध्या के जिला सहकारी बैंक के सभापति और प्रबंधन साहबान कौन सी ‘रतन-निद्रा’ में लीन हैं? कर्मचारियों का हक दबाकर रखना और फाइलों पर कुंडली मारकर बैठना—यही इन अधिकारियों का इकलौता ‘कुशल प्रबंधन’ रह गया है!
कर्मचारियों का यह आंदोलन कोई मामूली विरोध नहीं है, बल्कि उस घुटन का नतीजा है जो प्रबंधन के बहरेकानों तक आवाज पहुंचाने के लिए जरूरी हो गया था।अगर 16 अक्टूबर से बैंक के काउंटर बंद हुए और कामकाज ठप हुआ, तो इसका पूरा का पूरा ठीकरा उन रसूखदार कुर्सियों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों के सिर फूटेगा, जो अपनी जिद और लापरवाही के चलते, बैंक को संकट में धकेल रहे हैं।
सहकारी बैंक सीधे तौर पर किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम खाताधारकों से जुड़े होते हैं।ऐसे में कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से पूरा वित्तीय तंत्र चरमरा जाएगा, लेकिन साहबान को इसकी क्या परवाह, उनकी अपनी तनख्वाह और भत्ते तो समय पर मिल ही रहे हैं!
खैर, इसे कहते हैं ‘प्रबंधन की तानाशाही और कर्मचारियों का आक्रोश’, अब देखना यह है कि 16 अक्टूबर से आंदोलन की आग भड़कने से पहले जिला सहकारी बैंक के सभापति और प्रबंधन की नींद टूटती है और वे कर्मचारियों के वेतनमान का पिटारा खोलते हैं, या फिर अयोध्या के इस बैंक में भी ताले लटकने का इंतजार किया जाता है!
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Author: krjnews
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