खुर्जा/११अक्टूबर २०२३:
विश्वामित्र के यज्ञ में मारीच, सुबाहु से ने डाला विघ्न, प्रभु श्री राम ने किया वध।
श्री रामलीला कमेटी (रजिस्टर्ड) खुर्जा के तत्वाधान में श्री राम लीला महोत्सव- 2023 बहुत ही धूमधाम व हर्ष उल्लास के साथ रामलीला ग्राउंड जंक्शन रोड खुर्जा पर मनाया गया,जो 28 अक्टूबर 2023 तक चलेगा। खुर्जा की रामलीला एक ऐतिहासिक,पौराणिक व सुप्रसिद्ध रामलीला है। ऐसी रामलीला उत्तर भारत में सिर्फ और सिर्फ खुर्जा में ही होती है। खुर्जा को छोटी काशी नगरी भी कहा जाता है। जहां श्री राम जी की लीलाओं का मंचन खुले बाड़े में किया जाता है। स्थायी पंचवटी भी मौजूद है जो अपने आप में एक आकर्षण का केंद्र है। इसके अतिरिक्त स्टेज लीला की भी बहुत ही सुंदर व्यवस्था की जाती है। जिसमें टेंट के अंदर दर्शकों के बैठने लिए सोफा सेट, कुर्सियां आदि की बहुत ही सुंदर, सुव्यवस्थित व्यवस्था की जाती है। श्री रामलीला महोत्सव बहुत, प्रेम और एकता के साथ मनाया जाता है। इस महोत्सव की विशेषता है कि इसमें प्रत्येक धर्म, जाति एवं वर्ग के लाखों की संख्या में नर नारी, बुजुर्ग व बच्चे सम्मिलित होते हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी की लीलाओं को देखते हैं और मनन करते हैं। इसमें एक ओर उनकी धार्मिक भावनाओं की संतुष्टि होती है वहीं दूसरी ओर सामाजिक एकता की भावना की जागृति तथा पुष्टि भी होती है।
खुर्जा की रामलीला में लाखों की संख्या में नर-नारी एकत्रित होते हैं।इसके अतिरिक्त सैकड़ो की संख्या में दुकानें, खेल-तमाशे, चरखे व झूले तथा सभी धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं, सेवा समितियों, अखाड़े, क्लव व प्रशासनिक कैंप भी लगते हैं तथा रामलीला कमेटी के द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन भी कराये जाते हैं। विभिन्न प्रकार की लाइटों का अद्भुत अलौकिक दृश्य रामलीला ग्राउंड में अपनी छटा को बिखेरता है। जो अपने आप में देखने व दिखाने लायक ही बन पड़ता है।
लीला का मंचन पंडित श्री वेद प्रकाश शर्मा एवं पंडित श्री प्रेम प्रकाश शर्मा द्वारा किया गया।
विश्वामित्र जी ने मन में विचार किया। विचार आया कि भगवान का अवतार हो चुका है। भगवान महाराज श्री दशरथ के यहां पर अपनी शक्तियों के साथ,अवध में अवतरित हुए हैं । अब मुझे अवध के लिए चलना चाहिए और राजा दशरथ से राम लक्ष्मण को लेकर आना चाहिए। विश्वामित्र जी संध्या वंदन करने के बाद राजा दशरथ पहुंचते हैं।
राजा दशरथ उनका खूब आदर सत्कार करते हैं। मुनि विश्वामित्र राजा दशरथ को बताते हैं कि वे जब वन में यज्ञ करते हैं तो राक्षस उनके यज्ञ को तहस-नहस कर देते हैं। इसलिए वह यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से श्री राम लक्ष्मण को साथ भेजने की बात कहते हैं।
यह सुन राजा दशरथ श्री राम लक्ष्मण को भेजने से इन्कार कर देते हैं। वे कहते हैं कि वह यज्ञ की रक्षा के लिए पूरी सेना ले जाएं लेकिन श्री राम और लक्ष्मण को नहीं। इस पर गुरु वशिष्ठ के समझाने पर राजा दशरथ श्री राम लक्ष्मण को मुनि विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं।
जब मुनि विश्वामित्र ने रास्ते में श्री राम और लक्ष्मण को बताया कि इस जंगल में ताड़का नाम की राक्षसी का आतंक है जो लोगों को खा जाती है। इसी दौरान उनका सामना ताड़का से हो जाता है ताड़का उन्हें देखकर उन पर आक्रमण कर देती है। इस पर श्री राम ताड़का का वध कर देते हैं इसके बाद मुनि विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण को लेकर आश्रम में आ जाते हैं। मुनि विश्वामित्र आश्रम में शिष्यों के साथ यज्ञ कर रहे थे यज्ञ की रक्षा के लिए श्री राम लक्ष्मण तैनात थे। इसी दौरान मारीच और सुबाहु नाम के राक्षस यज्ञ को नष्ट करने के लिए पहुंच जाते हैं। श्री राम लक्ष्मण से उनका भीषण युद्ध होता है। अंत में श्री राम लक्ष्मण दोनों राक्षसों का वध कर देते हैं और यज्ञ निर्विरोध संपन्न होता है। फिर विश्वामित्र राम लक्ष्मण जी के साथ जनकपुरी पहुंचते हैं।
इस अवसर पर जनरल मैनेजर श्री राजीव बंसल, महामंत्री श्री नरेंद्र किशोर शर्मा, कोषाध्यक्ष श्री सचिन बंसल, प्रधान श्री नवीन कुमार एडवोकेट, मेला कोऑर्डिनेटर श्री विनीत आर्य, मीडिया प्रभारी डीसी गुप्ता सहसंयोजक ललित गुप्ता, वासुदेव शर्मा, प्रमोद वर्मा, आशीष गोविल, अशोक पालीवाल आदि दर्जनों कार्यकर्ता व सैकड़ो नर नारी उपस्थित रहे। जिन्होंने भगवान की लीलाओं का दर्शन करके अपने आप को धन्य किया। जय सियाराम।


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Author: krjnews
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