बुलन्दशहर : 6 / फरवरी / 2026 : खुर्जा स्थित सूरजमल जटिया राजकीय चिकित्सालय का प्रदेश सरकार की ‘एसआरएम’ (सपोर्टिव सुपरविजन एंड रिव्यू मिशन) योजना के तहत उच्चस्तरीय टीम द्वारा गहन निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की बारीकी से जांच की गई। निरीक्षण टीम का नेतृत्व कर रहे रामपुर के जिला क्वालिटी कंसल्टेंट डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि यह निरीक्षण केवल कमियां निकालने के लिए नहीं, बल्कि ‘गैप फाइंडिंग’ यानी व्यवस्थाओं में सुधार की गुंजाइश तलाशने के लिए किया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि 6 से 8 फरवरी तक मुरादाबाद, सहारनपुर और मेरठ मंडल में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न मंडलों के अधिकारी एक-दूसरे के क्षेत्रों में जाकर स्वास्थ्य केंद्रों का जायजा ले रहे हैं। डॉ. प्रशांत सिंह के साथ रामपुर के एआरओ राजीव कुमार भी टीम में शामिल रहे। टीम ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित चेकलिस्ट के अनुसार अस्पताल में मानव संसाधन (HR), रसद (Logistics) और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति जांची। इस दौरान खुर्जा के सीएमएस डॉ. दिनेश भी उपस्थित रहे और टीम को अस्पताल की कार्यप्रणाली से अवगत कराया। टीम को तीन दिनों के भीतर संबंधित ब्लॉक की कम से कम 15-20 स्वास्थ्य सुविधाओं का दौरा करना है।
डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि निरीक्षण में कुछ छोटे ‘गैप्स’ मिले हैं, जिन्हें मौके पर ही अस्पताल प्रशासन को सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल कोई बड़ी खामी सामने नहीं आई है। निरीक्षण के बाद मंडल के माध्यम से एक विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। पूरे प्रदेश से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए आगामी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सीएमएस डॉ. दिनेश ने कहा कि अक्सर ग्रामीण या आंतरिक क्षेत्रों के अस्पतालों में कुछ बुनियादी संसाधनों की कमी रह जाती है। इस सर्वेक्षण के माध्यम से उन कमियों की पहचान की गई है ताकि उन्हें समय रहते भरा जा सके। डॉ. दिनेश कुमार ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में कोई बड़ी खामी नहीं पाई गई है, लेकिन कुछ आधुनिक उपकरणों की मांग शासन को भेजी गई है। सीएमएस डॉ. दिनेश ने बताया कि उन्होंने अस्पताल के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुविधाओं की मांग की है । MRI मशीन गंभीर रोगों की सटीक जांच के लिए , डिजिटल एक्स-रे बेहतर गुणवत्ता वाली रिपोर्ट के लिए , रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीनें तो उपलब्ध हैं, लेकिन विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण मरीजों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।
मरीजों की बढ़ती संख्या और व्यवस्था अस्पताल में मानसिक रोग और मस्तिष्क संबंधी रोगों के डॉक्टर की उपलब्धता पर उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सक सप्ताह में दो दिन (मंगलवार और शनिवार) अपनी सेवाएं देते हैं। मरीजों की संख्या 200 से 400 तक पहुँचने के कारण भीड़ अधिक रहती है, जिसे व्यवस्थित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। एक्स-रे फिल्म की समस्या पर स्पष्टीकरण एक्स-रे रिपोर्ट के लिए मरीजों द्वारा मोबाइल पर फोटो खींचने के मुद्दे पर डॉ. दिनेश ने कहा कि डिजिटल एक्स-रे के प्रावधान के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि फिल्म की अनुपलब्धता के कारण मरीज का इलाज न रुके। शासन की मंशा है कि तकनीकी कारणों से किसी का उपचार बाधित न हो, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं अपनाई जा रही हैं।
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Author: krjnews
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