9 / अप्रैल / 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विधायी संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण समय की मांग है और इससे भारतीय लोकतंत्र अधिक जीवंत, सहभागी और मजबूत बनेगा। महिला आरक्षण विधेयक पर अपने एक लेख में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी अब भी अपेक्षाकृत कम है, जिसे बदलना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक भविष्य को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अधिक अवसर मिलेंगे तो शासन व्यवस्था अधिक संवेदनशील, समावेशी और प्रभावी बनेगी।

अपने लेख में नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और सांसदों से इस दिशा में एकजुट होकर समर्थन देने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल किसी एक दल का नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं से जुड़ा विषय है।
सरकार महिला आरक्षण कानून को वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के बजट सत्र को 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिन के लिए बढ़ाया गया है। सरकार द्वारा तैयार मसौदे के अनुसार लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है, जिनमें लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं को राष्ट्र निर्माण में अधिक बड़ी भूमिका देने का संकल्प है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कदम भारत के लोकतंत्र को नई ऊर्जा देगा और आने वाले समय में महिलाओं की भागीदारी हर स्तर पर और अधिक मजबूत होगी।
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Author: krjnews
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