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तीन दिन से नहर में फंसी गर्भवती गंगा डॉल्फिन का सफल रेस्क्यू, ग्रीन कॉरिडोर बनाकर राप्ती नदी में छोड़ा

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सुनील पाठक , गोरखपुर

 

गोरखपुर :21 / जुलाई / 2026 :  त्रिवेणी नदी से भटककर देवरिया नहर में पहुंची और तीन दिनों तक फंसी रही एक गर्भवती गंगा डॉल्फिन को वन विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर, टीएसए फाउंडेशन इंडिया, सिंचाई विभाग और गोरखपुर पुलिस के संयुक्त अभियान से सुरक्षित रेस्क्यू कर राप्ती नदी में छोड़ दिया गया। विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई से एक दुर्लभ एवं संरक्षित जलीय जीव का जीवन बचाया जा सका।

जानकारी के अनुसार, त्रिवेणी नदी से भटककर डॉल्फिन देवरिया नहर के रास्ते परतावल के निकट धरमौली बाजार तक पहुंच गई थी, जहां वह पिछले तीन दिनों से फंसी हुई थी। उसकी जान बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उत्तर प्रदेश अनुराधा बेमुरी एवं मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर बी.सी. ब्रह्मा के निर्देशन में मंगलवार को भी रेस्क्यू का प्रयास किया गया, लेकिन लगातार बारिश के कारण नहर में पानी का बहाव तेज होने से सफलता नहीं मिल सकी।

 

इसके बाद सिंचाई विभाग के सहयोग से नहर में पानी का स्तर कम कराया गया। बुधवार को कुशीनगर वन प्रभाग के हाटा रेंज अंतर्गत सिसवां शुक्ल ग्राम सभा के पास देवरिया नहर से डॉल्फिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया।

रेस्क्यू अभियान का नेतृत्व गोरखपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह तथा टीएसए फाउंडेशन इंडिया के डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने किया। इस दौरान गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर वन विभाग की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ अभियान में जुटी रहीं।

रेस्क्यू के बाद डॉल्फिन को विशेष डॉल्फिन एम्बुलेंस में रखा गया, जहां डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने उसका प्राथमिक उपचार एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में डॉल्फिन की लंबाई 7 फीट 2 इंच, वजन 147 किलोग्राम पाया गया। वह मादा एवं गर्भवती थी।

डॉल्फिन को उसके प्राकृतिक और सुरक्षित आवास में पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस के माध्यम से राजघाट स्थित राप्ती नदी ले जाया गया। इस दौरान गोरखपुर पुलिस ने भटहट से राजघाट तक ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराया, जिससे लगभग 52 किलोमीटर की दूरी महज 1 घंटा 5 मिनट में तय कर डॉल्फिन को सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ दिया गया।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट समन्वय, समयबद्ध कार्रवाई और तकनीकी दक्षता के चलते इस दुर्लभ एवं संरक्षित जलीय जीव का जीवन बचाया जा सका। पूरे अभियान में वन विभाग, सिंचाई विभाग, गोरखपुर पुलिस, गोरखपुर चिड़ियाघर तथा टीएसए फाउंडेशन इंडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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Author: krjnews

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