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प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में कारगिल शहीदों को किया नमन, आत्मनिर्भर भारत और जल संरक्षण पर दिया जोर

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नई दिल्ली : 26 / जुलाई / 2026 :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान देशवासियों को संबोधित करते हुए कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश के वीर शहीदों और सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई ऐसी तारीख है, जिसे याद रखने के लिए किसी कैलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती। यह दिन देशवासियों को भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान की याद दिलाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल की ऊंची चोटियों, कठिन मौसम और दुश्मन की चुनौतियों के बावजूद भारतीय जवानों का हौसला हर चुनौती से बड़ा था। उन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी वीर शहीदों और सैनिकों को नमन किया।

\उन्होंने बताया कि इस वर्ष देश में वीर जवानों की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से विशेष ‘शौर्य विजय यात्रा’ निकाली जा रही है। 14 जुलाई को दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल से शुरू हुई यह मोटरसाइकिल यात्रा द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल तक पहुंचेगी। इसका संदेश ‘वन राइड, वन नेशन, वन सैल्यूट’ है।

प्रधानमंत्री ने देश की बढ़ती रक्षा क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत रक्षा उत्पादन और तकनीक के क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरि, पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट और कुशा मिसाइल से जुड़े रक्षा क्षेत्र के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान का जिक्र करते हुए देशवासियों से बारिश की हर बूंद को सहेजने की अपील की। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी का संचयन, भूजल रिचार्ज, पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन और वृक्षारोपण भविष्य की पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है।

उन्होंने मध्य प्रदेश के सीधी और नरसिंहपुर, महाराष्ट्र के नासिक, आंध्र प्रदेश के नंद्याल तथा छत्तीसगढ़ के कोरबा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने आसपास किसी एक तालाब, कुएं या बावड़ी की जिम्मेदारी लेने और पानी की हर बूंद बचाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने भारतीय खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं की उपलब्धियों पर भी गर्व जताया। उन्होंने बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु की उपलब्धि और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने संस्कृत को खेलों से जोड़ने के लिए केरल के एक स्कूल में चलाए जा रहे ‘अक्षरकंदुक’ अभियान की भी सराहना की।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र द्वारा विकसित रॉकेट विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने के बाद देश के युवा इनोवेटर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है।

प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के शानदार प्रदर्शन की भी सराहना की और कहा कि देश के युवा विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कश्मीर की पारंपरिक ‘वगू’ चटाई को नई पहचान देने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं को संरक्षण देकर उन्हें नई पीढ़ी से जोड़ना बेहद जरूरी है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लखीवाला गांव की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही ‘विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी’ का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों और महिलाओं के आत्मविश्वास से शुरू हुआ यह प्रयास आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का जिक्र करते हुए पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी की सराहना की। उन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में बड़े पैमाने पर पौधारोपण और उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में करोड़ों पौधे लगाए जाने का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पेड़ केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि अनगिनत जीव-जंतुओं के घर भी हैं। गुजरात के गिर के जंगलों में इंडियन ग्रे हॉर्नबिल की वापसी को उन्होंने संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बताया।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने बिहार के सीतामढ़ी में सिंगल यूज प्लास्टिक के कचरे से बेंच बनाए जाने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘Reduce, Reuse और Recycle’ अब केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से गणेश उत्सव के दौरान देश की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने की अपील दोहराई। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है।

उन्होंने 7 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का उल्लेख करते हुए बुनकरों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों का सम्मान करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले त्योहारों में लोगों को खादी, हैंडलूम और हस्तशिल्प से जुड़े कम से कम एक उत्पाद की खरीदारी जरूर करनी चाहिए।

उन्होंने त्रिपुरा के पारंपरिक वाद्ययंत्र ‘चौंगप्रेंग’ को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों की भी सराहना की और देशवासियों से अपने क्षेत्र के पारंपरिक वाद्ययंत्रों और संगीत को सोशल मीडिया के माध्यम से बढ़ावा देने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम के व्यक्तित्व में एक शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी और उन्होंने हमेशा बच्चों तथा युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री ने देश के सभी शिक्षकों और गुरुजनों को नमन करते हुए कहा कि माता-पिता हमारे प्रथम गुरु होते हैं और शिक्षक हमें ज्ञान की दिशा दिखाते हैं।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी स्वतंत्रता दिवस का उल्लेख करते हुए देशवासियों से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि तिरंगा देश की स्वतंत्रता, संविधान और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के लिए अपने सुझाव और विचार साझा करने का भी आग्रह किया और कहा कि जनभागीदारी से ही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है।

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Author: krjnews

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