गाजियाबाद : 2 / सितम्बर / 2026 : सड़क पर बने गड्ढों की मरम्मत में लगने वाले घंटों के समय और भारी मशीनरी से निजात दिलाने के लिए अब नई तकनीक ECOFIX के इस्तेमाल का प्रस्ताव सामने आया है।
फ्लैट ओनर फेडरेशन गाजियाबाद के चेयरमैन एवं वीर चक्र विजेता कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने 1 सितंबर को लोहिया नगर स्थित अधिशासी अभियंता कार्यालय में PWD के अधिशासी अभियंता राम राजा से मुलाकात कर इस तकनीक की जानकारी साझा की।

कर्नल त्यागी ने बताया कि वर्तमान में सड़क के गड्ढों की मरम्मत के लिए पहले पॉटहोल की सफाई की जाती है, उसके बाद उसमें गिट्टी डालकर गर्म तारकोल भरा जाता है और फिर उसे दबाने के लिए वजन या मशीनरी का इस्तेमाल किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लगता है और कई बार यातायात भी रोकना पड़ता है। इसके मुकाबले ECOFIX तकनीक से पॉटहोल की मरम्मत करीब 15 मिनट में पूरी करने का दावा किया गया है।
उन्होंने बताया कि ECOFIX में स्टील उद्योग से निकलने वाले वेस्ट स्लैग का उपयोग किया जाता है। एक टन स्टील के उत्पादन में करीब 200 किलोग्राम स्लैग निकलता है, जिसे पहले अक्सर अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता था। अब इस स्लैग को पॉलिमर बाइंडर के साथ मिलाकर सड़क के गड्ढों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

कर्नल त्यागी के अनुसार इस तकनीक में न तो पॉटहोल की विस्तृत सफाई की जरूरत होती है, न बड़ी मशीनरी की और न ही तारकोल को गर्म करने की। यहां तक कि गड्ढे में पानी होने की स्थिति में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। सामग्री डालने के बाद करीब 15 मिनट में सड़क को यातायात के लिए खोला जा सकता है।
उन्होंने बताया कि 5 सितंबर 2025 को दिल्ली की एक सड़क पर केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) द्वारा PWD मंत्री की मौजूदगी में ECOFIX तकनीक का प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद दिल्ली के अलावा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में भी इसके इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। कर्नल त्यागी ने बताया कि ECOFIX की लागत करीब 16 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है।
कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने ECOFIX से संबंधित पूरी तकनीकी जानकारी अधिशासी अभियंता राम राजा को सौंपी और कहा कि इसके इस्तेमाल से सड़क मरम्मत का काम तेज होने के साथ-साथ निर्माण सामग्री की बचत और प्रदूषण में कमी लाने में भी मदद मिल सकती है। उन्होंने दावा किया कि पारंपरिक पैच रिपेयर की तुलना में ECOFIX से किया गया रिपेयर लंबे समय तक टिकाऊ हो सकता है और इसकी अवधि करीब 25 वर्ष तक होने का दावा किया जा रहा है।
वहीं, अधिशासी अभियंता राम राजा ने कर्नल त्यागी के प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए कहा कि प्रस्ताव को तत्काल उच्च अधिकारियों एवं प्रशासन के समक्ष भेजा जाएगा। साथ ही इस तकनीक को अपनाकर सड़क के गड्ढों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
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Author: krjnews
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