गोरखपुर : 22 / अक्टूबर / 2026 : गोरखपुर में देसी शराब गैर लाइसेंस की दुकानों से भी बिकते देखी जा रही है जिसका कोई समय निर्धारण नहीं होता है इसका कोई रेट फिक्स है लेकिन जिम्मेदारों को यह दिखाई नहीं देता आखिर कारण क्या है सरकार जब देसी अंग्रेजी बियर शराब बेचने के लिए लाइसेंस देती है और इसका टैक्स सरकार के पास जमा होता है लेकिन यहां तो विभागीय अधिकारी ही सरकार के राजस्व को पलीता लगा रहे हैं मतलब राजस्व का नुकसान कर रहे हैं क्योंकि विभाग अपना राजस्व बना रहा है यह गोरखपुर जनपद में कोई नया खेल नहीं है।

लेकिन विभागीय और स्थानीय पुलिस के सहयोग से यह काम भी होता है अब यह विभाग और स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी है की अवैध तरीके से बिक रही शराब पर रोक लगा पाते हैं या नहीं। जबकि लाइसेंसी दुकानों पर शराब के हर ब्रांड का रेट निर्धारित होता है और आमजन मानस भी इस बात को जानता है लेकिन गैर लाइसेंस की दुकानों पर वही रेट बढ़ाकर बेचा जाता है और इनका कोई समय सीमा निर्धारित नहीं रहता है आए दिन देखे जाते हैं।
पान की दुकान, चाय की दुकान ,गुटका बीड़ी सिगरेट की दुकान, पर यह सब चीज आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं लेकिन विभाग अपनी कमियों को छिपाने के लिए उच्च अधिकारियों के निर्देश पर मशहूर और बदनाम जगह पर छापेमारी के अवैध शराब कच्ची शराब पर कार्रवाई कर देती है और वाह वाही लूट लेती हैलेकिन विभाग कभी भी ऐसे संदेह हॉस्पद जगह पर छापे नहीं करती है जहां पर अवैध बिक्री की जाती है आखिर बाकी जगह से विशेष सूत्र से पता चल जाता है इन जगहों पर विशेष सूत्रों से पता क्यों नहीं चल पाता यह अपने आप में एक चिंतन का विषय है। जबकि विभाग को पूरी जानकारी इन सब मामलों की रहती है विभाग को अपने सूत्रों को लगाकर जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और इस अवैध तरीके से बिक रही शराबों पर कड़ाई से कार्रवाई करनी चाहिए ताकि सरकार के राजस्व का लाभ हो सके।
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Author: krjnews
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