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डीएम साहब, एक नजर इधर भी! शिकारपुर सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल

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शिकारपुर  : 30 / अक्टूबर / 2026 :    एक तरफ प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिकारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

अस्पताल में डॉक्टरों की कथित गैरमौजूदगी, दूसरे स्थानों पर तैनाती और अटैचमेंट को लेकर मिल रही शिकायतों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सरकारी अस्पताल में ही मरीजों को समय पर चिकित्सक नहीं मिलेंगे तो ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे सुधरेगी?

स्थानीय स्तर पर मिली शिकायतों और सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीएचसी में तैनात कुछ चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इनमें महिला चिकित्सक डॉ. सोनम सचान, गाइनेकोलॉजिस्ट, डॉ. शिखा, बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ. सरिता, गाइनेकोलॉजिस्ट एवं सर्जन और डॉ. मिंटू, दंत चिकित्सक के नाम शामिल हैं।

शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि संबंधित चिकित्सक नियमित रूप से अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहते। डॉ. सोनम सचान की सेवाएं बुलंदशहर में दिए जाने की भी चर्चा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित चिकित्सकों की ड्यूटी का रिकॉर्ड जांच का विषय है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत डॉक्टर रूबी की ड्यूटी शिकारपुर ब्लॉक क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच और उपचार के लिए होने की जानकारी सामने आई है।

आरोप है कि निर्धारित कार्यस्थलों पर सेवाएं देने के बजाय उनकी गतिविधियां अन्य स्थानों पर रहती हैं। यदि ऐसा है तो इसकी जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि स्कूलों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हो रही है या नहीं।

जिला चिकित्सालय में तैनात दंत चिकित्सक सुष्मिता स्नेहा के शिकारपुर सीएचसी में अटैचमेंट को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह सीएचसी अधीक्षक शशि शेखर सिंह की पत्नी हैं। ऐसे में उनके अटैचमेंट की प्रक्रिया, प्रशासनिक अनुमति और ड्यूटी की व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। हालांकि, इस संबंध में किसी अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामले में सीएचसी अधीक्षक शशि शेखर सिंह से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कथित तौर पर कहा, ‘यही काम है मीडिया वालों के पास या और कोई काम है?’ वहीं, सीएमओ सुनील दोहरे से जानकारी करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का दावा किया गया है। अधिकारियों की ओर से आरोपों पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से सवाल और गहरे हो गए हैं।

सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब और ग्रामीण मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। यदि चिकित्सकों की अनुपस्थिति या ड्यूटी में लापरवाही की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो इसका सीधा असर मरीजों और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

अब जिला प्रशासन और जिलाधिकारी से मांग उठ रही है कि शिकारपुर सीएचसी में चिकित्सकों की उपस्थिति, ड्यूटी रोस्टर, आरबीएसके कार्यक्रम और अटैचमेंट से जुड़े अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का भरोसा कायम रह सके।

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Author: krjnews

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