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रामलीला मैदान में नागफाश की लीला का हुआ मंचन

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खुर्जा/२३ अक्टूबर २०२३: श्री रामलीला कमेटी रजिस्टर्ड खुर्जा के तत्वाधान में आज ,रामनवमी के दिन, जंक्शन रोड स्थित श्री रामलीला मैदान में नागफाश की लीला, हनुमान जी द्वारा मेघनाथ जी का यज्ञ विध्वंस, लक्ष्मण जी व मेघनाथ के बीच में घनघौर युद्ध तथा मेघनाथ का लक्ष्मण जी के हाथों मारा जाना, सुलोचना का प्रलाप व सती होने की लीला का सजीव चित्रण किया गया… देर शाम रामलीला मैदान में रावण अपने छोटे भाई कुंभकरण की मृत्यु पर बहुत ही व्याकुल एवं क्रोधित अवस्था में भेष बदलने में माहिर अपने भाई अहिरावण के पास जाता है…
तथा उसे समस्त वृतांत बताता है ..अहिरावण जिसे प्रभु का वरदान था निद्रा में लीन।
श्री रामचंद्र जी व उनके अनुज लक्ष्मण जी को नाग फास में बांधकर पाताल लोक ले जाता है ।जैसे ही शंकर सुमन हनुमान को पता लगता है, वह पाताल लोक पहुंच जाते हैं तथा प्रभु रामचंद्र जी व‌ लक्ष्मण जी को जो नाग फास में बंधे तिल तिल मौत के आगोश में जाते देखकर गरुड़ जी के पास जाकर उनसे सभी हाल बताते हैं और विनती करते हैं की प्रभु रामचंद्र जी व लक्ष्मण जी को नागफाश से मुक्त करा दें।गरुण जी अपने इष्ट देव प्रभु रामचंद्र जी वअनुज लक्ष्मण जी को नाग फास से मुक्त कर देतेहैं। तब पवन पुत्र हनुमान व लंकेश के छोटे भाई अहिरावण का भयंकर युद्ध होता है।जिसमें अहिरावण मारा जाता है। यह देखकर सभी देवता प्रसन्न होते हैं। अहिरावण की मृत्यु का समाचार पाकर लंका नरेश रावण क्रोध से पागल हो जाता है… वह अपने बड़े पुत्र इंद्रजीत को पुनः युद्ध का निर्देश देते हैं।अभिमानी मेघनाथ युद्ध विजय हेतु यज्ञ का आयोजन करता है।विभीषण के बताने पर लक्ष्मण जी वानर दल में शामिल पवन पुत्र हनुमान सहित बड़े योद्धाओं को यज्ञ भूमि में जाकर मेघनाथ का यज्ञ भंग कर देते हैं।
यज्ञ भंग से निराश मेघनाथ बिना यज्ञ पूर्ण करे ही युद्ध में कूद पड़ता है।श्री रामचंद्र जी के आदेश पर रावण पुत्र मेघनाथ और श्री रामचंद्र जी के अनुज लक्ष्मण में घनघौर युद्ध होता है। जिसमें मेघनाथ लक्ष्मण जी के हाथों मारा जाता है।मेघनाथ का कटा शीश लेकर जय श्री राम और लक्ष्मण का उद्घोष करते प्रभु राम के पास आते हैं…. मेघनाथ की मृत्यु का समाचार सुनकर लंका में शोक की लहर दौड़ जाती है। पति के वध से व्याकुल सती सुलोचना के करुण प्रलप से श्रद्धालुओं की आंखें नम हो जाती हैं। सती सुलोचना के विलाप और अपने पति मेघनाथ का शीश मांगने पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम मेघनाथ का कटा शीश सम्मान के साथ सुलोचना को सौंप देते हैं तथा मेघनाथ का पार्थिव शरीर लंका के गेट पर सम्मान सहित पहुंचा देते हैं.. अंत में सुलोचना मेघनाथ के साथ सती हो जाती है। मेघनाथ का पुतला धू धू कर जल उठता है ..श्री राम के जय घोष से संपूर्ण वातावरण राम मय हो जाता है… लंकेश रावण अपने पुत्र वियोग में व्याकुल हो जाता है …इस अवसर पर नवीन कुमार प्रधान, नंदकिशोर शर्मा महामंत्री, राजीव बंसल जनरल मैनेजर, विनीत आर्य मेला कोर्डिनेटर, सचिन बंसल कोषाध्यक्ष, प्रमोद कुमार वर्मा, उमाशंकर अग्रवाल, आशीष गोविंल, अशोक पालीवाल,अशोक टिम्मी ,योगेश मित्तल ,राजेश शर्मा ,रवि शंकर अग्रवाल ,महेश भार्गव, संजय भगत जी, डीसी गुप्ता मीडिया संयोजक, ललित गुप्ता मीडिया सह संयोजक, चंद्र प्रकाश तायल मीडिया इंचार्ज, विकास वर्मा, शुभम गुप्ता, राजीव वार्ष्णेय, पुनीत साहनी आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं कमेटी सदस्य उपस्थित रहे।

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Mp SIngh Rana
Author: Mp SIngh Rana

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