रोजमर्रा के सामान हो सकते है सस्ते , जीएसटी विभाग ने दिए संकेत
नई दिल्ली 🙁 पी .आई. बी ) , 1 जुलाई 2025 को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के आठ वर्ष पूरे हो जाएंगे।
2024-25 के दौरानजीएसटी का रिकॉर्ड सकल संग्रह,सर्वेक्षण में उद्योग जगत से जुड़े 85 प्रतिशतलोगों ने इस प्रणालीका समर्थन किया |
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे “नए भारत का एक मार्गदर्शक कानून”बताया था। आठ वर्ष बाद, आंकड़े खुद ही इसकी गवाही देरहे हैं। वर्ष 2024-25 में, जीएसटी का सकल संग्रह 22.08 लाखकरोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचगया, जोकि वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर 9.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह वृद्धि अर्थव्यवस्था के बढ़ते औपचारिकीकरण और बेहतर कर अनुपालन को दर्शाती है।हाल ही में आई डेलॉइट की ‘जीएसटी@8’ शीर्षक रिपोर्ट में जीएसटी की दृष्टि से पिछले वर्ष को बेहद ही सफलकरार दिया गया है। इस रिपोर्ट ने इस सफलता का श्रेय मुख्य रूप से सरकार द्वारा सही समय पर किए गए सुधारों, करदाताओं को दिए गए स्पष्ट मार्गदर्शन और जीएसटी पोर्टल पर लगातार किए गए अपग्रेड को दिया। इन उपायों से न केवल व्यवसाय करने में आसानी हुई, बल्कि कर का आधार भी मजबूत हुआ। आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में 2017 में शुरू किए गए, जीएसटी ने अप्रत्यक्ष करों के मकड़जाल को हटाकर उसकी जगह एक एकल वएकीकृत प्रणाली को स्थापित कर दिया। इससे कर अनुपालन आसान हो गया, कारोबारियोंकी लागत कम हो गईऔर माल को विभिन्न राज्यों में बिना रोक-टोक के ले जाने की अनुमति मिल गई। पारदर्शिता और दक्षता को बेहतर करके, जीएसटी ने एक सशक्त एवं अपेक्षाकृतअधिक एकीकृत अर्थव्यवस्था की नींव रखने में मदद की।हाल ही में आई डेलॉइट की ‘जीएसटी@8’ शीर्षक रिपोर्ट में जीएसटी की दृष्टि से पिछले वर्ष को बेहद ही सफलकरार दिया गया है। इस रिपोर्ट ने इस सफलता का श्रेय मुख्य रूप से सरकार द्वारा सही समय पर किए गए सुधारों, करदाताओं को दिए गए स्पष्ट मार्गदर्शन और जीएसटी पोर्टल पर लगातार किए गए अपग्रेड को दिया। इन उपायों से न केवल व्यवसाय करने में आसानी हुई, बल्कि कर का आधार भी मजबूत हुआ। भारत में जीएसटी की दरें जीएसटी परिषद द्वारा निर्धारित की जाती हैं। इस परिषद में केन्द्र और राज्य या केन्द्र-शासित प्रदेश की सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। जीएसटी की वर्तमान संरचना में दरों के चार मुख्य स्तर (स्लैब) हैं: 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत। ये दरें देशभर में अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होती हैं मुख्य स्लैब के अलावा, तीन विशेष दरें भी हैं: सोना, चांदी, हीरा और आभूषण पर 3 प्रतिशत, कटे एवं पॉलिश किए गए हीरे पर 1.5 प्रतिशत और कच्चे हीरे पर 0.25 प्रतिशत। तंबाकू के उत्पादों, वातित पेय और मोटर वाहनों जैसे चुनिंदा सामानों पर अलग-अलग दरों पर जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर भी लगाया जाता है। इस उपकर का उपयोग राज्यों को जीएसटी प्रणाली को अपनाने के परिणामस्वरूप राजस्व में होने वालीकिसी भी हानि की भरपाई के लिए किया जाता है।

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Author: krjnews
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