खुरजा : 30 / अगस्त / 2026 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खुरजा नगर की ओर से रविवार को सरस्वती विद्या मंदिर, जंक्शन रोड में नगर एकत्रीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने अनुशासनबद्ध तरीके से सहभागिता की।
इस अवसर पर मेरठ प्रान्त के प्रान्त प्रचारक अनिल ने स्वयंसेवकों को स्वतंत्रता, भारतीय इतिहास, राष्ट्रभाव, हिन्दू संगठन, सामाजिक समरसता और वर्तमान भारत में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों सहित विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया।

प्रान्त प्रचारक अनिल ने स्वतंत्रता के विषय पर कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के आत्मबोध, स्वाभिमान और अपनी संस्कृति के प्रति गौरव से भी जुड़ी है। स्वतंत्रता प्राप्ति के लंबे संघर्ष में अनेक ज्ञात-अज्ञात वीरों ने अपना सर्वस्व राष्ट्र के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों के संघर्ष और त्याग को याद रखना तथा नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराना समाज का दायित्व है।
भारतीय इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध भारतीय समाज ने अलग-अलग कालखंडों में संघर्ष किया। अनेक वीरों ने अपनी स्वतंत्रता, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। इतिहास को समझने का उद्देश्य किसी के प्रति द्वेष पैदा करना नहीं, बल्कि अतीत से प्रेरणा लेकर राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्व को समझना होना चाहिए।
उन्होंने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ ने प्रारंभ से ही हिन्दू समाज के संगठन को आधार बनाकर राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए व्यक्ति निर्माण का कार्य किया है। शाखा के माध्यम से अनुशासन, संस्कार, सेवा, राष्ट्रभक्ति, आत्मीयता और सामाजिक दायित्व की भावना विकसित की जाती है।

अनिल ने कहा कि संघ के कार्य की प्रेरणा से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक संगठन और संस्थाएं राष्ट्रहित में कार्य कर रही हैं। शिक्षा, सेवा, योग, आध्यात्मिकता, सामाजिक जागरण और राष्ट्र निर्माण जैसे क्षेत्रों में समाज के लोग अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्य का भाव जागृत करना है।
उन्होंने कहा कि आज देश में अपनी सांस्कृतिक पहचान और हिन्दुत्व को लेकर समाज में आत्मविश्वास बढ़ा है। राष्ट्रीय पहचान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ी है और राष्ट्रीय ध्वज तथा राष्ट्र के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना भी व्यापक हुई है। उन्होंने 1991-92 में तिरंगा फहराने से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए इसे देश के बढ़ते आत्मविश्वास और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति केवल आर्थिक और सामरिक शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की एकता, संस्कार, आत्मविश्वास और राष्ट्रभाव उसकी वास्तविक शक्ति हैं। उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम, भाषा अथवा क्षेत्र के आधार पर समाज को बांटने के प्रयासों से सावधान रहते हुए एकता और एकात्मता को मजबूत करना आवश्यक है।
गुरु गोविंद सिंह और चार साहिबजादों के बलिदान का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसे अनेक महापुरुष और वीर हुए हैं, जिन्होंने धर्म, संस्कृति और समाज की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनके योगदान को किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं किया जा सकता।
सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए अनिल ने कहा कि समाज में किसी भी वर्ग को अलग मानने की मानसिकता समाज को कमजोर करती है। महात्मा बुद्ध और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी महापुरुष पूरे समाज की धरोहर हैं।
उन्होंने कहा कि शहीदों की कोई जाति नहीं होती और महापुरुष किसी एक जाति के नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के होते हैं। ऐसे में उनके नाम पर विभाजन या विवाद के बजाय उनके जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर समाज को जोड़ने का प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने स्वयंसेवकों से सेवा, अनुशासन, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति और संगठन की भावना को मजबूत करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठित और संस्कारित समाज ही शक्तिशाली राष्ट्र का आधार बनता है।
नगर एकत्रीकरण के दौरान स्वयंसेवकों में उत्साह और अनुशासन का वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्र की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा के प्रति संकल्प को मजबूत करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम राष्ट्र एवं समाजहित में निरंतर कार्य करने के आह्वान के साथ सम्पन्न हुआ।
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Author: krjnews
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