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आकाशीय बिजली से गुम्बज का छज्जा गिरा, घायल दोनों अधिवक्ताओं की मौत

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सुनील पाठक , गोरखपुर

 

गोरखपुर : 11 / सितम्बर / 2026 :   राप्ती नदी के किनारे स्थित राजघाट के गुरु गोरक्षनाथ घाट पर रविवार को आकाशीय बिजली गिरने के दौरान गुम्बज का छज्जा गिरने से घायल हुए दोनों अधिवक्ताओं की इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल अधिवक्ता आलोक अस्थाना (45) और अधिवक्ता संजय सिंह (42) को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद दोनों की जान नहीं बच सकी। इस दुखद घटना से दोनों परिवारों के साथ ही गोरखपुर के अधिवक्ता समाज में शोक की लहर दौड़ गई।

घटना रविवार सुबह करीब 11:30 बजे की है। राप्ती नदी किनारे गुरु गोरक्षनाथ घाट पर विनोद तिवारी की माता के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में अधिवक्ता भी पहुंचे थे।

इसी दौरान आलोक अस्थाना और संजय सिंह घाट परिसर में लोगों के बैठने के लिए बनाए गए ऊंचे चबूतरे पर बने गुम्बज के नीचे बैठे थे। अचानक मौसम बदला और बारिश शुरू हो गई। इसी दौरान आकाशीय बिजली गिरने से तेज झटका लगा और गुम्बज का छज्जा नीचे गिर गया। दोनों अधिवक्ता मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल मलबा हटाकर दोनों अधिवक्ताओं को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। आलोक अस्थाना की हालत गंभीर थी। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से बेहतर उपचार के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

मेडिकल कॉलेज ले जाते समय उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं संजय सिंह को भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब नौ घंटे तक चिकित्सकों की निगरानी में उपचार चलने के बाद रात लगभग आठ बजे उनकी भी मौत हो गई।

घटना के बाद एंबुलेंस के पहुंचने में कथित देरी को लेकर परिजनों और अधिवक्ताओं की ओर से सवाल उठाए गए। परिजनों का आरोप था कि सूचना देने के बावजूद एंबुलेंस को मौके पर पहुंचने में समय लगा। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम की जांच शुरू करा दी है। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अधिवक्ता आलोक अस्थाना की पत्नी की शिकायत पर सीएमओ डॉ. राजेश झा और जिला अस्पताल के कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत में इलाज से संबंधित लापरवाही और बातचीत के दौरान कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद अस्पताल में मौजूद आक्रोशित अधिवक्ता शांत हुए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

घटना की जानकारी मिलते ही परिवार के लोग और बड़ी संख्या में अधिवक्ता अस्पताल पहुंचे। दोनों अधिवक्ताओं की मौत की सूचना से परिवारों में मातम छा गया। देर रात तक बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर और पुलिस चौकी पर अधिवक्ताओं तथा परिजनों का आना-जाना लगा रहा। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूरी करते हुए संजय सिंह के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

घटना का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने राहत एवं सहायता की प्रक्रिया में तेजी लाई। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि आपदा राहत कोष से दोनों मृत अधिवक्ताओं के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान कर दी गई है।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच-पांच लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलने के बाद यह राशि भी दोनों परिवारों को उपलब्ध करा दी जाएगी।

डीएम दीपक मीणा ने कहा कि जिला प्रशासन दुख की इस घड़ी में दोनों परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ा है। परिवारों को नियमानुसार हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हादसे के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कराई जा रही है।

गोरक्षनाथ घाट पर अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के बैठने और विश्राम के लिए आठ से अधिक ऊंचे चबूतरे बनाए गए हैं। इन चबूतरों के ऊपर गुम्बज के आकार के छज्जे बने हुए हैं। हादसे के बाद इन निर्माणों की स्थिति और गुणवत्ता को लेकर भी प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी ने तत्कालीन जेई और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। निर्माण कार्य से जुड़े अभिलेखों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कराई जा रही है।

डीएम ने कहा कि आकाशीय बिजली गिरने से हुए हादसे के साथ-साथ निर्माण की मजबूती, छज्जे की स्थिति, एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम और उपचार में लापरवाही के आरोपों की भी जांच होगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन का प्रयास है कि पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत मिले और भविष्य में घाट परिसर में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

दो अधिवक्ताओं की असमय मौत से गोरखपुर के अधिवक्ता समाज में गहरा शोक है। प्रशासन ने एक ओर जहां दोनों परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है, वहीं दूसरी ओर हादसे के कारणों और संभावित लापरवाही की जांच शुरू कराकर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।

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Author: krjnews

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