खुर्जा : 16 / मार्च / 2026 : खुर्जा क्षेत्र के गांव दशहरा खैरली के किसानों ने टीएचडीसी (THDC) द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना और सहमति के खेतों में हाई-टेंशन बिजली की लाइनें बिछाने और खंभे गाड़ने का कड़ा विरोध किया है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन और कंपनी तानाशाही रवैया अपनाते हुए रात के अंधेरे में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी फसलों और भविष्य की सुरक्षा पर संकट खड़ा हो गया है।
मधुर प्रताप सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि टीएचडीसी द्वारा पहले ही भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है और प्लांट सुचारू रूप से चल रहा है। लेकिन अब विद्युत वितरण के लिए जो हाई-टेंशन लाइनें निकाली जा रही हैं, उसके लिए न तो किसानों को कोई नोटिस दिया गया और न ही उनकी सहमति ली गई।
किसानों का आरोप है कि जब वे सुबह अपने खेतों पर पहुँचते हैं, तो उन्हें वहां जबरन खंभे गड़े हुए मिलते हैं। मधुर प्रताप सिंह ने मुआवजे के मुद्दे पर कहा कि कंपनी पुराने ‘इंडियन टेलीग्राफ एक्ट’ के तहत मामूली मुआवजा देना चाहती है, जबकि भारत सरकार की 2025 की नई गाइडलाइंस के अनुसार किसानों को ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) यानी उनके खेतों के ऊपर से गुजरने वाले तारों का भी उचित मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “अभी तक किसानों को एक रुपया भी मुआवजा नहीं मिला है, जबकि लाइनें पूरी कर विद्युत वितरण भी शुरू कर दिया गया है।”

किसानों ने यह भी मुद्दा उठाया कि नई लाइनों का सर्वे गांव की घनी आबादी के पास से किया गया है। सरकारी नियमों के अनुसार हाई-टेंशन लाइनों को आबादी से एक निश्चित दूरी पर होना चाहिए। किसानों ने सवाल किया कि क्या विकास की कीमत सिर्फ किसानों को ही चुकानी होगी? ग्रामीणों ने आज अपनी मांगों के संबंध में एसडीएम (SDM) खुर्जा को एक ज्ञापन सौंपा। किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का उचित समाधान नहीं निकाला गया और तानाशाही बंद नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस दौरान नीरज सिंह, मधुप प्रताप सिंह,अजय कुमार,पंकज चौहान,ओम प्रकाश चौहान,सतवीर सिंह, योगेंदर पाल सिंह, राम्भु, ओमवीर सिंह बड़ी संख्या में गांव के किसान और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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Author: krjnews
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