सुनील पाठक , गोरखपुर
गोरखपुर : 25 / सितम्बर / 2026 : श्यामदेउरवा थाने में दर्ज जालसाजी और फ्राड के मुकदमे की विवेचना को लेकर वादी श्याम नारायण तिवारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि मुकदमे के विवेचक उप निरीक्षक आलोक कुमार राय ने अभियुक्तों से मिलीभगत कर मुकदमे की जांच प्रभावित की और ऐसे पांच लोगों को गवाह बना दिया, जिन्होंने स्वयं गवाही देने से इनकार किया है।
वादी के मुताबिक इन कथित गवाहों ने नोटरी शपथपत्र देकर कहा है कि उन्होंने मुकदमे में कोई गवाही नहीं दी है और विवेचक द्वारा दर्शाए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।

श्याम नारायण तिवारी ने बताया कि मामला मुकदमा संख्या 165/2026 की विवेचना से संबंधित है। उनका आरोप है कि विवेचक द्वारा जिन पांच लोगों के बयान और हस्ताक्षर मुकदमे की विवेचना में दर्शाए गए हैं, उन लोगों ने शपथपत्र देकर स्पष्ट किया है कि उन्होंने न तो इस मामले में कोई बयान दिया और न ही संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं।
उन्होंने कहा कि कथित गवाहों में एक व्यक्ति ऐसा भी है जो पढ़ा-लिखा नहीं है और सामान्य तौर पर हस्ताक्षर के बजाय अंगूठा लगाता है, लेकिन विवेचना में उसके नाम के सामने हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं। वादी ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रेसवार्ता में श्याम नारायण तिवारी ने आरोप लगाया कि उनके पट्टीदार एवं मुकदमे में नामजद सच्चिदानन्द तिवारी, रणजीत तिवारी, राजीव तिवारी आदि ने कथित रूप से जालसाजी और फर्जीवाड़े के माध्यम से उनकी पैतृक भूमि अपने नाम दर्ज करा ली। उन्होंने बताया कि ग्राम बसवार में करीब चार एकड़ 11 डिसमिल तथा जनपद कुशीनगर के थाना अहिरौली क्षेत्र के ग्राम मंगलपुर में करीब चार एकड़ पैतृक भूमि है।
उनके अनुसार कुल करीब आठ एकड़ 11 डिसमिल जमीन के संबंध में विवाद है। उनका दावा है कि जमीन के नामांतरण और अभिलेखों में दर्ज कराए जाने में कथित तौर पर फर्जीवाड़ा किया गया, जिसके कारण उनका परिवार भूमिहीन होने की स्थिति में पहुंच गया।
वादी के अनुसार उन्होंने मामले को लेकर करीब एक वर्ष तक विभिन्न स्तरों पर शिकायतें कीं। पुलिस के उच्चाधिकारियों से लेकर आईजीआरएस के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजे जाने का उन्होंने दावा किया। उनका कहना है कि अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश के बाद श्यामदेउरवा थाने में संबंधित लोगों के विरुद्ध जालसाजी और फ्राड सहित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
श्याम नारायण तिवारी का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेजों और आरोपों की समुचित जांच नहीं की गई। इसके बजाय विवेचक ने कथित रूप से ऐसे लोगों को गवाह के तौर पर दर्शाया, जिन्होंने बाद में शपथपत्र देकर उनके नाम और हस्ताक्षर के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। वादी ने कहा कि यदि गवाहों के शपथपत्र सही हैं तो यह जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विवेचक ने बिना पर्याप्त जांच के मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी। वादी ने यह भी आरोप लगाया कि अभियुक्त पक्ष के प्रभाव में आकर विवेचना की गई और मामले को समाप्त करने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रेसवार्ता में लगाए गए आरोपों पर संबंधित विवेचक अथवा आरोपी पक्ष का पक्ष सामने नहीं आया है।
वादी ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस के उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आईजीआरएस के माध्यम से भी शिकायत किए जाने की बात कही। उनका कहना है कि अब उनका मुख्य उद्देश्य कथित फर्जी गवाहों के शपथपत्र, हस्ताक्षरों और विवेचना में दर्ज बयानों की जांच कराकर वास्तविकता सामने लाना है।
प्रेसवार्ता के दौरान श्याम नारायण तिवारी ने कहा कि जिन लोगों को विवेचना में गवाह बताया गया है, यदि वे शपथपत्र देकर स्वयं कह रहे हैं कि उन्होंने गवाही नहीं दी और उनके हस्ताक्षर भी उनके नहीं हैं, तो इस बिंदु की जांच आवश्यक है। उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच किसी अन्य अधिकारी से कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि भूमि विवाद और कथित जालसाजी से जुड़े इस मामले में वह लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। अब मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने और कथित फर्जी गवाहों के शपथपत्र सामने आने के बाद उन्होंने दोबारा उच्चाधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है।
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Author: krjnews
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