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लैंसडाउन की वादियों में उपन्यास ‘पंजा’ पर साहित्यिक संगोष्ठी , मनुष्य और पशु के भावनात्मक रिश्ते से लेकर सैन्य जीवन तक के विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा

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गाजियाबाद  : 25 / सितम्बर / 2026 :   उत्तराखंड की सुरम्य वादियों में साहित्य और प्रकृति के अनूठे संगम के बीच प्रसिद्ध लेखिका वंदना यादव के चर्चित उपन्यास ‘पंजा’ पर तीन दिवसीय ‘नेचर एंड लिटरेचर रिट्रीट’ के तहत विशेष साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

22 से 24 सितंबर तक लैंसडाउन के गोउनु क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में साहित्य, सेना, समाज और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संयोजन युवा लेखिका शिवानी यादव ने किया।

 

संगोष्ठी में उपन्यास ‘पंजा’ की कथा, पात्रों और उसके सामाजिक एवं मानवीय सरोकारों पर विस्तार से चर्चा हुई। उपन्यास के नायक ‘बंधू’ की जन्मस्थली उत्तराखंड होने के कारण इसी धरती पर उसके चरित्र और कथा पर चर्चा ने आयोजन को विशेष बना दिया।

उपन्यास में एक वेटरन डॉग के दृष्टिकोण से मनुष्य और पशु के बीच के भावनात्मक रिश्ते, सैन्य अभियानों तथा युद्ध और सैन्य जीवन से जुड़े मानवीय पहलुओं को प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम में हिंदी अकादमी दिल्ली के पूर्व उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा, अद्विक प्रकाशन के अशोक गुप्ता, नारनौल के समाजसेवी गिरीश खेड़ा, शिक्षाविद् मोना खेड़ा, देहरादून के कर्नल भरत प्रकाश और दिल्ली के कर्नल पुष्पेंद्र कुमार यादव सहित अनेक साहित्यप्रेमियों ने विचार रखे।

ऋषि कुमार शर्मा ने कहा कि ‘पंजा’ को केवल एक प्रशिक्षित सैन्य कुत्ते की कहानी के रूप में देखना इसके व्यापक मानवीय पक्ष को सीमित कर देगा। उन्होंने ‘बंधू’ के चरित्र, उसकी संवेदनाओं और मनुष्य के साथ उसके संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि पशु अपनी बात शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, लेकिन उनके व्यवहार और भाव-भंगिमाओं में गहरी संवेदनाएं दिखाई देती हैं।

समाजसेवी गिरीश खेड़ा ने कहा कि उपन्यास मनुष्य को प्रकृति और जीव-जगत के प्रति अपनी जिम्मेदारी पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। वहीं कर्नल पुष्पेंद्र कुमार यादव ने सैन्य अभियानों में प्रशिक्षित कुत्तों की भूमिका, उनके अनुशासन और संचालकों के साथ विकसित होने वाले विश्वास पर अपने अनुभव साझा किए। कर्नल भरत प्रकाश ने भी सैन्य जीवन के अनुभवों के आधार पर उपन्यास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

अद्विक प्रकाशन के अशोक गुप्ता ने लेखिका वंदना यादव की रचनात्मक यात्रा और उनकी विभिन्न विधाओं में लेखन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रकाशन की ओर से वंदना यादव की अलग-अलग विधाओं में दस पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है। शिक्षाविद् मोना खेड़ा ने नई पीढ़ी को साहित्य, प्रकृति और जीव-जगत से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

लेखिका वंदना यादव ने उपन्यास के कथानक, नायक ‘बंधू’ और रचना के लिए किए गए शोध के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपन्यास लिखने के दौरान सैन्य जीवन, अभियानों और प्रशिक्षित कुत्तों की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार ‘बंधू’ केवल एक पात्र नहीं, बल्कि मनुष्य और पशु के बीच संवेदनात्मक रिश्ते को समझने का माध्यम है।

कार्यक्रम संयोजक शिवानी यादव ने कहा कि साहित्य के माध्यम से पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार का संदेश समाज तक पहुंचाना ऐसे आयोजनों का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। संगोष्ठी में साहित्य और सैन्य अनुभवों के माध्यम से मनुष्य-पशु संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर सार्थक संवाद हुआ।

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Author: krjnews

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