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विरासत-ए-मुकेश में गूंजे मुकेश के अमर नगमे, सुरों ने रचा यादों का भावपूर्ण संसार

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नोएडा  : 30 / सितम्बर / 2026 :   महान पार्श्वगायक मुकेश की अमर गायकी और उनकी कालजयी संगीत विरासत को समर्पित विशेष संगीतमय संध्या ‘विरासत-ए-मुकेश’ का आयोजन रविवार को एनईए भवन ऑडिटोरियम, सेक्टर-6, नोएडा में किया गया।

Harmony Waves-Khurja के तत्वावधान में आरजे कपिल तिवारी एवं कल्पना तिवारी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने संगीतप्रेमियों को मुकेश के सदाबहार गीतों के माध्यम से भावनाओं, स्मृतियों और संवेदनाओं की अनूठी यात्रा कराई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुजीत ओझा रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुमित मिश्रा, अनिल सिंह (नोएडा), प्रीति श्रीवास्तव, अनिल शर्मा, अवधेश शर्मा, संध्या गांधी, गरिमा मिश्रा एवं बबिता शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

संगीत संध्या में कुल 32 प्रस्तुतियां हुईं। एकल एवं युगल प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने मुकेश के लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज, भावनाओं और विशिष्ट अंदाज में प्रस्तुत किया। हर प्रस्तुति ने मुकेश की गायकी की संवेदनशीलता और आत्मीयता को मंच पर पुनर्जीवित किया।

कार्यक्रम में प्रस्तुत गीतों के माध्यम से मुकेश के संगीत की विविध भावभूमि—प्रेम, विरह, मिलन, स्मृति, संवेदना और जीवन-दर्शन—एक साथ दिखाई दी। कलाकारों की प्रस्तुतियों को श्रोताओं की भरपूर सराहना मिली और अनेक गीतों ने पूरे सभागार को भावनाओं से भर दिया।

कार्यक्रम की संकल्पना और प्रस्तुति को लेकर कपिल तिवारी की विशेष सराहना हुई। उपस्थित संगीतप्रेमियों के बीच यह भावना सुनाई दी कि शानदार कार्यक्रम तो बहुत लोग करते हैं, लेकिन कपिल तिवारी ने ‘विरासत-ए-मुकेश’ को जिस आत्मीयता, अनुशासन और जीवंतता के साथ प्रस्तुत किया, उसमें चूक और त्रुटि की गुंजाइश लगभग समाप्त हो गई।

‘विरासत-ए-मुकेश’ केवल मुकेश के गीतों की विरासत को मंच पर पुनर्जीवित करने का प्रयास नहीं रहा, बल्कि उनके असाधारण आत्मिक और सौम्य व्यक्तित्व को आत्मसात करने की एक सुंदर कोशिश भी दिखाई दी।

मुकेश के व्यक्तित्व की सादगी, विनम्रता और आत्मीयता की झलक कपिल तिवारी के व्यवहार में ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के संस्कारों में भी दिखाई देती है। यह आयोजन इस बात का सुंदर उदाहरण बना कि जिस व्यक्तित्व का हम श्रद्धा से स्मरण करते हैं और जिसके आदर्शों का अनुसरण करते हैं, उसकी छाप धीरे-धीरे हमारे स्वभाव और व्यवहार में भी आकार लेने लगती है।

यही कारण रहा कि कार्यक्रम में केवल मुकेश के गीत ही नहीं गूंजे, बल्कि उनकी सादगी, संवेदना और आत्मीयता का भाव भी पूरे वातावरण में महसूस किया गया।

कार्यक्रम के निर्देशक डॉ. अशोक श्रीवास्तव तथा आयोजन से जुड़े कपिल तिवारी एवं कल्पना तिवारी ने सभी अतिथियों, कलाकारों, वादकों और संगीतप्रेमियों को खुर्जा की सुप्रसिद्ध मिठाई ‘खुरचन’ के साथ उपहार भेंट कर आभार व्यक्त किया।

विरासत-ए-मुकेश’ ने यह एहसास फिर से जीवंत कर दिया कि सच्चा संगीत समय के साथ पुराना नहीं होता, बल्कि हर पीढ़ी के दिल में नई धुन बनकर जीवित रहता है। जब उस संगीत के साथ कलाकारों की श्रद्धा, परिवार के संस्कार और आयोजन की आत्मीयता जुड़ जाए, तो वह केवल कार्यक्रम नहीं रहता, बल्कि एक यादगार विरासत बन जाता है।

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Author: krjnews

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