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बनघुसरा डाक घर को पुनः पुराने स्थान पर स्थापित करने के लिए शिकायत दर शिकायत, सुनवाई शून्य

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अयोध्या : 2 / अक्टूबर / 2026 :   मामला अयोध्या जनपद के विकास खंड तारुन के गाँव बनघुसरा का है। गाँव वासियों द्वारा पोस्ट मास्टर जनरल उत्तर प्रदेश को दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार बनघुसरा गाँव में स्थापित डाकघर गाँव की आबादी तथा इस गाँव के निकटतम आने वाले अन्य छोटे छोटे गाँव व पुरवों की जनता की सुलभता व सहजता को देखते हुए बनघुसरा गाँव को केंद्र बिंदु मानते हुए वर्ष 1982 में स्थापना हुई थी।

तब से डाकघर का संचालन बनघुसरा गाँव में ही होता रहा। डाकघर खुलने व बंद होने के समय कर्मचारियों के कार्य व ब्यवहार को लेकर निगरानी में भी गाँव वासी रहा करते थे। किन्तु शालू सिंह पुत्री बृज किशोर सिंह की जबसे यहाँ डाकपाल के पद पर नियुक्ति हुई है तबसे वे डाकघर नहीं आती हैं, शालू सिंह के पिता बृज किशोर सिंह भी डाक विभाग में कर्मचारी हैं।

गाँव वासियों का कहना है नवनियुक्त शाखा डाक पाल शालू सिंह को कोई पहचानता तक नहीं है। क्योंकि शालू सिंह कभी पोस्ट ऑफिस आती ही नहीं जब जनता ने काम करते उनको देखा ही नहीं तो लोग पहचानेंगे कैसे। उधर यह भी सामने आ रहा है कि शालू सिंह के पिता बृज किशोर सिंह डाक विभाग के पुराने कर्मचारी हैं और उनके द्वारा एसडीआई पूर्वी से सांठगांठ करके अनर्गल प्रलाप व टिप्पणी करके रिपोर्टिंग के आधार पर उक्त पोस्ट ऑफिस को दूसरे गाँव की सीमा के भीतर स्थापित कर दिया गया है।

बनघुसरा गाँव एक बड़ी आबादी की संख्या वाला गाँव है और जो भी अन्य गाँव इसके दायरे में आते हैं उनकी दूरी एक किलोमीटर के अंदर की है। वर्तमान में पोस्ट ऑफिस जहाँ स्थापित है उस स्थान की दूरी 4 किलोमीटर व दशा दिशा उल्टी है। इसके अलावा उप डाकघर खपराडीह की दूरी 12 से 13 किलोमीटर के लगभग है। बड़े पैमाने पर बनघुसरा गाँव के पोस्ट ऑफिस में डाकघर से संबंधित कार्यों का संपादन होता था जिसमें जमा निकासी आदि सभी शामिल हैं।

इसका भौतिक सत्यापन से पता लगाया जा सकता है।यदि इस प्रकरण का गोपनीय स्तर पर गोपनीय निरीक्षण किया जाए तो सच सामने आ जाएगा। वहीं जानकारी मिली है कि डाकघर जहाँ पहले स्थापित था वहाँ से उप डाकघर खपराडीह की दूरी 6 से 7 किलोमीटर थी और वर्तमान में जहाँ है वहाँ से लगभग 12 से 13 किलोमीटर की दूरी है जिससे और भी समस्या का सामना लोगों को करना पड़ता है, यही नहीं बनघुसरा का पोस्ट ऑफिस वर्तमान में जहाँ किया गया है वहां से तारुन के डाकघर की दूरी मात्र एक किलोमीटर बताई जाती है।

क्षेत्र वासियों व बनघुसरा वासियों का कहना है कि बुजुर्ग महिला/पुरुषों व असहाय विधवाओं को डाकघर आने जाने में काफी समस्या होती है। जिसके कारण विभागीय उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई है किन्तु कोई भी मामले को संज्ञान में लेने की जहमत नहीं उठा रहा है।

अयोध्या महानगर महापौर गिरीश पति त्रिपाठी द्वारा भी इस संबंध में प्रवर डाक अधीक्षक अयोध्या मंडल को पत्र लिखा जा चुका है कि बनघुसरा गाँव के डाकघर को पुनः पूर्व संचालित स्थान पर स्थापित किया जाए किंतु ऐसा लगता है कि सभी जिम्मेदार गहरी नींद में सो रहे हैं कोई न जनता की समस्या को संज्ञान में ले रहा है और न ही एसडीआई पूर्वी बृजकिशोर सिंह व उनकी पुत्री शालू सिंह की मनमानी पर किसी का ध्यान जा रहा है , न ही एक महत्वपूर्ण पद पर बैठे जनप्रतिनिधि के पत्र को ही महत्व दिया जा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि एसडीआई पूर्वी डाक कर्मचारी बृजकिशोर सिंह के दूर के रिश्तेदार हैं इसलिए सब कुछ मनमानी ढंग से चल रहा है। और डाक घर को शालू सिंह के भाई व पिता कभी कभी झोले में पैक करके लेकर चलते हैं सभी कार्य यही लोग संपादित करते हैं शालू सिंह केवल हस्ताक्षर बनाती हैं। जन समस्या गंभीर है लेकिन जिम्मेदार नेत्रहीन हैं।

कल 01 अक्टूबर गुरुवार को धर्म सेना भारत के प्रमुख संतोष दुबे ने भी प्रवर डाक अधीक्षक अयोध्या को पत्र लिखकर डाक घर पुनः पुराने स्थान पर स्थापित कराने की सिफारिश की है साथ ही प्रवर डाक अधीक्षक से सवाल भी किया है कि आखिर डाक पाल शालू सिंह पर कोई कार्यवाई क्यों नहीं हो रही है और जन शिकायतों का संज्ञान क्यों नहीं लिया जा रहा है। फिलहाल अब देखना ये है कि डाक विभाग के आलाअफसरान डाक पाल शालू सिंह पर ही मेहरबान रहते हैं या फिर जनता की समस्या का समाधान करते हैं।

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Author: krjnews

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