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अदबी तहज़ीब को आबाद कर रही है बारादरी: शफ़क सोपोरी

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गाजियाबाद : 5 / अक्टूबर / 2026 :   नेहरू नगर स्थित सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में आयोजित ‘महफ़िल-ए-बारादरी’ में देश-दुनिया से आए कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से साहित्यिक समां बांध दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर डॉ. शफ़क सोपोरी ने कहा कि यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत की मिसाल है।

बारादरी के तराने कश्मीर से कन्याकुमारी तक अदब को आबाद करने का काम कर रहे हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध पत्रकार एवं कवि अनुराग मुस्कान ने कहा कि बारादरी में धुरंधर कवियों और शायरों को सुनकर वह तीन दशक पीछे चले गए। मंच पर फनकारी का हर रंग मौजूद है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मनीषा जोशी की सरस्वती वंदना ‘मां शरण में आ गई मैं, दीप बन जलती रहूंगी…’ से हुआ। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. शफ़क सोपोरी के शेर ‘आरजू है कि तेरे हाथों में, अपना चेहरा छिपा के मर जाएं’ को श्रोताओं ने खूब सराहा।

मुख्य अतिथि अनुराग मुस्कान ने कहा कि बारादरी देशभर के फनकारों का गुलशन बनी हुई है, जो गीत, गजल और शायरी की खुशबू से महक रहा है। उन्होंने अपने अशआर से श्रोताओं की खूब दाद बटोरी। उन्होंने कहा कि लेखन के शुरुआती दौर में सीखा गजल का व्याकरण मीडिया की दुनिया में आने के बाद बिगड़ गया।

मीडिया की व्यस्तता में जिंदगी के रदीफ-काफिए ही बिगड़ गए। मानवीय रिश्तों पर पढ़े उनके अशआर ‘अपने जैसे यारों के कहां यार मिलेंगे, जितने लोग मिलेंगे बेकार मिलेंगे। मिला के कंधा चलने वाला कोई नहीं, मर जाओ तो देने वाले चार मिलेंगे। मेरी मय्यत पर भी तो अश्क बहाता कोई, गली के मोड़ तक ही सही पर आता तो सही’ को भरपूर सराहना मिली।

संस्था के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंघल के शेर ‘इन दबी सिसकियों से क्या होगा, लोग बहरे हैं चीखना होगा। सोचिए क्यों वो दे गया गाली, टालिए मत कि सिरफिरा होगा’ पर भी श्रोताओं ने जमकर दाद दी। संस्थापिका अध्यक्ष डॉ. माला कपूर ‘गौहर’ के अशआर ‘नाज बरदार देर से आए, कुछ अदाकार देर से आए, नाम-ए-गौहर ही सुर्खियों में रहा, आज अखबार देर से आए’ सहित अन्य रचनाओं को भी सराहा गया।

मशहूर शायर मासूम गाजियाबादी के शेर ‘जो काफिर और मोमिन में सुलह कराने निकले थे, वही फिरका परस्ती के कायल निकल आए। वो इक मासूम पागल थी कि जिसका जिस्म ढकने को, सुना है चांद को ढकने कई बादल निकल आए’ ने भी श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।

रूस से आईं श्वेता सिंह ने अपनी रचना ‘उस रब के इतने मजहब क्यूं हैं, खुद को अव्वल बताने को बेसबब क्यूं है, सच है कि हर रूह से झांकता है तू, तेरी औलाद फिर इतनी बेअदब क्यूं है’ पेश कर खूब सराहना हासिल की। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध गीतकार इंद्रजीत सुकुमार को ‘बारादरी सृजन सम्मान’ से अलंकृत किया गया।

उनकी पंक्तियां ‘यूं भी दिल में आना जाना कीजिए, खुद से मिलने का बहाना कीजिए’ और उनका गीत भी श्रोताओं को पसंद आया।
कार्यक्रम का संचालन खुश्बू सक्सेना और आलोक यात्री ने संयुक्त रूप से किया। खुश्बू सक्सेना की पंक्तियां ‘मैं अगर आम की हवा होती, रोज ही चांदनी के घर जाती। देख रखी है मौत की सूरत, आईना देखती तो डर जाती’ भी खूब सराही गईं।

कार्यक्रम में डॉ. तारा गुप्ता, राजीव सिंघल, सुरेंद्र शर्मा, संजीव शर्मा, विनय विक्रम सिंह, डॉ. नसीम अहमद, डॉ. नरेंद्र शर्मा, प्रदीप भट्ट, संजीव निगम अनाम, मनीषा जोशी, दिनेश कुमार श्रीवास्तव, शरवत उस्मानी, ऋचा सूद, डॉ. राम गोपाल भारतीय, अभिलाषा विनय, आशीष मित्तल, मारिया उस्मानी, संदीप परवाना, मनीषा गुप्ता, संजीव नादान, शुभ्रा पालीवाल और श्वेता श्रीवास्तव ‘शैदी’ सहित अन्य रचनाकारों की रचनाएं भी सराही गईं।

इस अवसर पर सुभाष चंदर, सरवर हसन, मोनी गोपाल शर्मा, पंडित सत्य नारायण शर्मा, वी.के. शेखर, अनिमेष शर्मा ‘आतिश’, देवेंद्र शर्मा ‘देव’, सोनम यादव, अरुण चंद्र राय, विपिन जैन, राधा रमण, सुभाष अखिल, डॉ. सुमन गोयल, सुशील शर्मा, तिलक राज अरोड़ा, देवेंद्र गर्ग, अक्षयवरनाथ श्रीवास्तव, सुमित्रा शर्मा, शशिकांत भारद्वाज, पुनीता झा, संजय भदौरिया, फरहत खान, अर्चना शर्मा, विनोद कुमार तोमर, राज कुमार सिंह, अशहर इब्राहिम, राजेश कुमार, उत्कर्ष गर्ग, डॉ. हिमांशु कुमार सिंह, नीलम सिंह, किरण कुमारी, मनु बुदेली, श्वेता चौधरी, कल्पना, दीपा वर्मा और यश शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

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Author: krjnews

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