बुलंदशहर : 9 / अगस्त / 2025 : आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की खुरजा नगर की सभी शाखायो पर रक्षाबंधन का कार्यक्रम मनाया गया। खुरजा नगर की कालिंदी कुंज मे लगने वाली भरत शाखा पर भी रक्षाबंधन का कार्यक्रम बनाया कार्यक्रम मे श्री सामर्थ्य ज़ी ( माननीय सह नगर संघचालक, खुरजा नगर , श्री मान आनंद ज़ी (सह प्रान्त प्रचारक, मेरठ प्रान्त), श्री मान सुदर्शन ज़ी ( नगर कार्यवाह, खुरजा नगर ) ने भारत माता का पूजन कर कार्यक्रम की शुरुआत की कार्यक्रम मे श्री मान आनंद जी का पाठ्य प्राप्त हुआ श्री मान आनंद ज़ी ने बताया कि आज हम सभी स्वयंसेवक बंधु रक्षाबंधन के कार्यक्रम के लिए एकत्रित हुए है रक्षाबंधन कार्यक्रम संघ के मुख्य 6 कार्यक्रम मे से एक है। रक्षाबंधन ऐसा ही एक पावन पर्व है, जो केवल भाई-बहन के प्रेम तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की रक्षा के संकल्प का संदेश देता है।प्राचीन काल में यह पर्व “रक्षा सूत्र” के रूप में जाना जाता था। गुरुकुल में आचार्य अपने शिष्यों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते थे, जिससे वे धर्म, सत्य और राष्ट्र की रक्षा करने का व्रत लेते थे। युद्ध के समय महिलाएं वीरों की कलाई पर राखी बांधकर उनसे समाज की रक्षा का वचन लेती थीं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में रक्षाबंधन का पर्व विशेष रूप से बंधुत्व और संगठन की भावना को दृढ़ करने के लिए मनाया जाता है। शाखा में कार्यक्रम: इस दिन शाखा पर स्वयंसेवक एक-दूसरे को राखी बांधते हैं और एक-दूसरे की सुरक्षा, सम्मान और सहयोग का संकल्प लेते हैं। संघ इस पर्व को अवसर बनाकर समाज में जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के भेद मिटाकर सभी को एक परिवार के रूप में जोड़ने का कार्य करता है। आज जब समाज में विघटनकारी प्रवृत्तियां और विदेशी सांस्कृतिक आक्रमण बढ़ रहे हैं, रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि –हमें अपने परिवार के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की रक्षा करनी है। भाइयों की सुरक्षा में बहनों का विश्वास और आशीर्वाद है, और बहनों की गरिमा की रक्षा में भाइयों का जीवन समर्पित है। हर नागरिक को “मैं भारत का पुत्र हूँ, भारत मेरी माता है, और उसकी रक्षा मेरा धर्म है” – इस भाव से जीना चाहिए।एक बार श्रीकृष्ण ने शिशुपाल वध के समय सुदर्शन चक्र चलाया, जिससे उनकी उंगली कट गई और रक्त बहने लगा। यह देखकर द्रौपदी व्याकुल हो उठीं। पास में न कपड़ा था न पट्टी, तो उन्होंने अपने आँचल का एक टुकड़ा फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बाँध दिया। कृष्ण ने भावुक होकर कहा “सखी, आज से मैं तेरा ऋणी हूँ। जब भी तुझे मेरी आवश्यकता होगी, मैं हाज़िर रहूँगा।” यही रक्षा का वचन आगे चलकर उस समय सिद्ध हुआ, जब द्रौपदी चीरहरण की पीड़ा में पुकारती हैं और श्रीकृष्ण असीम वस्त्र देकर उनकी लाज बचाते हैं यह कथा रक्षाबंधन के पवित्र बंधन का प्रतीक है न केवल भाई-बहन, बल्कि हर उस रिश्ते का, जहाँ रक्षा और स्नेह का वचन निभाया जाता है। संघ कि स्थापना विजयदशमी 1925 को मोहितेके भाड़े मे शुरू हुयी वही व्रतवृक्ष शताब्दी वर्ष मे प्रवेश कर रहा है। कि सभी स्वयंसेवको को स्वदेशी सामान का उपयोग करने के लिए कहा। इतनी बात कहकर अपनी बात को पूर्ण किया कार्यक्रम के बाद भगवा ध्वज को रक्षासूत्र बांधकर सेवा बस्ती मे जाकर बस्ती मे रहने वाले लोगो को रक्षा सूत्र बांधा।कार्यक्रम मे सभी कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।

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Author: krjnews
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