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ये कैसी स्वास्थ्य व्यवस्था? गोरखपुर एम्स की कार्यकारी निदेशक को ही इलाज के लिए जाना पड़ा निजी अस्पताल

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 गोरखपुर  : 31 / अक्टूबर / 2026 :    पूर्वांचल और बिहार के सीमावर्ती जिलों के मरीजों के लिए उम्मीद बने गोरखपुर एम्स की स्वास्थ्य सुविधाओं पर एक घटनाक्रम ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता की तबीयत खराब होने पर उन्हें संस्थान में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा। बताया जा रहा है कि वह करीब आधे घंटे तक निजी अस्पताल में रहीं और फिर वापस लौट आईं।

इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब एम्स की शीर्ष अधिकारी को ही आवश्यक चिकित्सा सुविधा के लिए निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा, तो यहां इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले आम मरीजों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता होगा। गंभीर हृदय रोगों से जुड़े मरीजों के लिए कैथ लैब जैसी सुविधा बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके अभाव में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ सकता है, जिससे उपचार में देरी और परिजनों की परेशानी बढ़ने की आशंका रहती है।

गोरखपुर एम्स की स्थापना के करीब सात साल बाद भी कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पूर्वांचल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद में यहां पहुंचते हैं। ऐसे में जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की कमी मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

अब सवाल यह है कि एम्स में कैथ लैब जैसी महत्वपूर्ण सुविधा शुरू करने में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है? इसकी शुरुआत के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और मरीजों को कब तक इसका लाभ मिल सकेगा? इस घटनाक्रम ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, संसाधनों की उपलब्धता और गंभीर मरीजों के उपचार की व्यवस्था पर जवाबदेही तय करने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

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Author: krjnews

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