ग्रामीण पत्रकारिता के पुरोधा स्व. बाबू बालेश्वर लाल की 39 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित

बुगरासी | 28 / मई / 2026 : ग्रामीण पत्रकारिता के पुरोधा स्व. बाबू बालेश्वर लाल की 39 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। सबसे पहले उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए गये | कस्बे में संगठन के संस्थापक स्वर्गीय बाबू बालेश्वर लालजी की 39 वीं पुण्यतिथि यतेन्द्र त्यागी के बुगरासी स्थित आवास पर श्रध्दा सुमन अर्पित कर सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकारों एवं गणमान्य लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा ग्रामीण पत्रकारिता में उनके योगदान को याद किया।


इस अवसर पर पत्रकार योगेन्द्र शर्मा व चंद्र पाल सिंह ने अपने-अपने संबोधन में कहा कि स्वर्गीय बाबू बालेश्वर लाल जी ने उस दौर में ग्रामीण पत्रकारिता को नई पहचान दिलाई, जब गांव-कस्बों की समस्याएं मुख्यधारा की खबरों में स्थान नहीं पाती थीं। उन्होंने पत्रकारिता को केवल समाचार तक सीमित न रखकर समाज सेवा का माध्यम बनाया। उनके प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंची और अनेक सामाजिक मुद्दों को मजबूती मिली।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण पत्रकार यतेन्द्र त्यागी ने ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और स्वर्गीय बाबू बालेश्वर लाल जी ने निष्पक्ष एवं निर्भीक पत्रकारिता की जो अलख जगाई, वह आज भी पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है। डाक्टर संतोष चौहान ने भी अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारों को सत्य एवं निष्पक्षता के मार्ग पर चलते हुए समाज हित में कार्य करना चाहिए, यही स्वर्गीय बाबू बालेश्वर लाल जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम में पत्रकार योगेन्द्र शर्मा चंद्रपाल सिंह यतेन्द्र त्यागी उधम सिंह अनिल कुमार आदि पत्रकारों सहित अनेक गणमान्य लोग नितिन शर्मा डाक्टर संतोष चौहान मूलचंद गोस्वामी संजीव गुर्जर राजकुमार सिसोदिया परिक्षित त्यागी उर्फ नवी त्यागी उपस्थित रहे। सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
संस्थापक स्वर्गीय बाबू बालेश्वर लाल की उपलब्धियों में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन देश के ग्रामीण पत्रकारों के हितों के लिए कार्य करने वाले प्रमुख संगठनों में से एक माना जाता है।
स्वर्गीय बाबू बालेश्वर लाल जी ने ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर पत्रकारिता को जनसेवा से जोड़ा।
उस समय सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण पत्रकार गांव-गांव जाकर समाचार संकलित करते थे, जिसे आज भी पत्रकारिता की समर्पित परंपरा माना जाता है।

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Author: krjnews

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