गाजियाबाद : 3 / अगस्त / 2026 : गाजियाबाद में सावन के पहले सोमवार पर प्राचीन दूधेश्वरनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान शिव के जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर परिसर के बाहर तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।

दूधेश्वरनाथ मंदिर गाजियाबाद के प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में शामिल है। मान्यता है कि यह मंदिर कई सौ वर्ष पुराना है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के अनन्य भक्त रावण के पिता ऋषि विश्रवा इस स्थान पर भगवान शिव की आराधना करने आते थे। मंदिर के महंत नारायण गिरी के अनुसार, प्राचीन समय में यहां कैला गांव हुआ करता था, जिसे वर्तमान में केला भट्टा के नाम से जाना जाता है।

उस समय ग्वाले अपनी गायों को चराने के लिए यहां लाते थे। मान्यता है कि गायों का दूध स्वतः ही यहां स्थित शिवलिंग पर अर्पित हो जाता था। इस चमत्कार की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने यहां मंदिर का निर्माण कराया। इसी मान्यता के कारण मंदिर का नाम दूधेश्वरनाथ पड़ा। महंत नारायण गिरी ने बताया कि सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

इसी गहरी आस्था के चलते सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गईं। दर्शन, जलाभिषेक और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस की ओर से भी व्यापक प्रबंध किए गए।
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Author: krjnews
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