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कविता और शायरी के जरिए उठी पर्यावरण संरक्षण की आवाज, नेपाल त्रासदी ने झकझोरा

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गाजियाबाद  : 8 / सितम्बर / 2026 :   सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल, नेहरू नगर में आयोजित ‘महफिल-ए-बारादरी’ में साहित्य की विविध विधाओं के बीच नेपाल में आई त्रासदी और लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। कार्यक्रम में शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, मानवीय संवेदना और वैश्विक चेतना को मजबूत करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ इंद्रजीत सुकुमार की सरस्वती वंदना से हुआ। अध्यक्षीय उद्बोधन में सुप्रसिद्ध शायर आलोक अविरल ने कहा कि महफिल में भावनाओं की जो नदी बहती है, वह अंत तक पहुंचते-पहुंचते भावों का समंदर बन जाती है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में पर्यावरण को लेकर जिस सजगता के साथ चिंता व्यक्त की गई, उसे वैश्विक चेतना में बदलना जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मंच से उठी आवाज आगे चलकर सामूहिक मुहिम का रूप लेगी।

नेपाल की त्रासदी का उल्लेख करते हुए आलोक अविरल ने अपनी रचना के माध्यम से उजड़े शहर, मलबे में दबे जीवन और बच्चों के स्कूल की स्मृतियों को संवेदनशीलता के साथ सामने रखा। उनकी पंक्तियों ने सभागार में मौजूद श्रोताओं को गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि नोमान शौक ने अपनी रचना के माध्यम से वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर व्यंग्य किया और श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी। संस्था के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंघल ने अपनी चिर-परिचित शैली में रचनाएं प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी।

संस्थापिका अध्यक्ष डॉ. माला कपूर ‘गौहर’ ने बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरण के निरंतर क्षरण पर चिंता जताते हुए कहा कि यह समय केवल गीत, गजल और कविता तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि पृथ्वी की चित्कार सुनने का है। उन्होंने अपनी कविता ‘उम्मीद’ के माध्यम से विकास की दौड़ में प्रकृति पर पड़ रहे प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने नई सड़कें, पुल और मेट्रो के निर्माण के साथ प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने की आवश्यकता पर सवाल उठाया।

डॉ. उर्वशी अग्रवाल ‘उर्वी’ ने अपनी रचनाओं के माध्यम से संवेदना और आध्यात्मिक भावों को अभिव्यक्ति दी। उनकी पंक्तियों को श्रोताओं ने सराहा।
कार्यक्रम का संयुक्त संचालन आलोक यात्री और खुश्बू सक्सेना ने किया। खुश्बू सक्सेना ने अपने शेरों से खूब दाद बटोरी। उन्होंने चांद, आंखों और झील की सुंदर कल्पना को शब्दों में पिरोकर श्रोताओं को प्रभावित किया।

महफिल में मोनी गोपाल ‘तपिश’, वी.के. शेखर, सरवर हसन सरवर, डॉ. तारा गुप्ता, बी.के. वर्मा ‘शैदी’, अनिमेष शर्मा ‘आतिश’, डॉ. ईश्वर सिंह तेवतिया, विपिन जैन, डॉ. सुधीर त्यागी, डॉ. नसीम अहमद खान, सुरेंद्र शर्मा, इंद्रजीत सुकुमार, वागीश शर्मा, डॉ. नरेंद्र शर्मा, विनय विक्रम सिंह, संजीव निगम ‘अनाम’, संजीव शर्मा, सुमित्रा शर्मा, पवन कुमार तोमर, रजनीश त्यागी ‘राज’ और मारिया उस्मानी सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। उनकी रचनाओं को श्रोताओं ने सराहा।

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध संगीताचार्य हरी दत्त शर्मा को ‘बारादरी जीवन पर्यन्त साधना सम्मान’ से अलंकृत किया गया। कार्यक्रम में डॉ. स्मिता सिंह, सुभाष चंदर, पं. सत्य नारायण शर्मा, सुभाष अखिल, राधारमण, शकील अहमद सैफ, कुलदीप, अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव, डॉ. रत्ना पनिक्कर, सरवत उस्मानी, नीरज कौशिक, डॉ. सुमन गोयल, प्रो. इला भूषण जैन, फरहत खान, अजय मित्तल, दीपा वर्मा, दीपक मिश्रा, नीलम सिंह, डॉ. ज्योति शर्मा, अंकित तलवार, चैती शर्मा, डॉ. प्रीति त्रिगुणायत और वर्धमान रंजन गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

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Author: krjnews

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