अयोध्या : 6 / अक्टूबर / 2026 : अयोध्या जिले में एक जांच जो तीन वर्ष से लंबित है का मामला उच्च न्यायालय लखनऊ पहुंच गया है आरोप है कि जिसकी जांच क्षेत्राधिकारी बीकापुर राजेश तिवारी द्वारा लगभग 90 फीसदी कर दी गई थी उस जांच को आरोपी पक्ष के कहने पर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण को क्यों ट्रांसफर की गई ।
अगर ट्रांसफर की भी गई वर्ष 2023 से पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के कार्यालय में जांच ठंडे बस्ते में क्यों चली गई आखिर क्या है उस जांच में क्या तथ्य आ गए जिसमें उच्च पुलिस पुलिस अधिकारियों के साँसे अटक गईं वही मामले में मौजूदा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पुनः जुलाई में शिकायती पत्र दिया गया तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेश के बाद भी पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के कार्यालय में मातम सा पसर गया ।

सूत्रों की माने तो जांच में पुलिस विभाग के कई ऐसे लोग फंसने लगे जिसमें पुलिस अधीक्षक ग्रामीण कार्यालय में तैनात बाबू राजकुमार मौर्या उस जांच फाइल को दबाने में पूरी तरह लिप्त हो गया।
आलम ये था कार्यालय का शिकायत कर्ता के पूछने के बाद spra कार्यालय का जांच मुंशी फाइल आने के होने से ही इनकार कर देता है और कार्यालय से बाहर चला जाता था। जिसमें पुलिस अधिकारियों के मिलीभगत और जांच दबाने का मामला प्रतीत हुआ, और उच्च न्यायालय में पी आई एल मंगलवार को दाखिल कर दी और पूरे मामले की जांच और आख्या तलब करके सम्बन्धित लिप्त लोगों पर कार्यवाही के साथ साथ मामले की जांच किसी बड़े एजेंसी से करने की मांग की है।
मामले की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता उच्च न्यायालय ओम कार नाथ तिवारी कर रहे है जिन्होंने जनता हित में प्रशासन के भ्रष्टाचार के खिलाफ कई आदेश उच्च न्यायालय से आदेशित कराए है ।
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Author: krjnews
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