गाजियाबाद : 9 / अक्टूबर / 2026 : विजयनगर सेक्टर-9 के ए-ब्लॉक स्थित मकान संख्या ए-627 में कथित अवैध बोरिंग और एचआईजी श्रेणी के डुप्लेक्स भवन में अलग-अलग फ्लैट बनाए जाने की आशंका को लेकर मामला चर्चा में है। स्थानीय लोगों की शिकायतों के बीच भूगर्भ जल विभाग ने मौके पर पहुंचकर बोरिंग का काम रुकवा दिया।
साथ ही संबंधित पक्ष को नगर निगम की जलापूर्ति लाइन से कनेक्शन लेकर पानी का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए। इस कार्रवाई के बाद नगर निगम और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन में कथित निर्माण बदलाव और भूजल के इस्तेमाल को लेकर शिकायतें की गई थीं। इसके बावजूद समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं होने के आरोप हैं। हालांकि, शिकायतों की तारीख, संबंधित विभागों को दिए गए आवेदनों और उन पर हुई कार्रवाई का आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों पर किस स्तर पर क्या कदम उठाए गए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मकान संख्या ए-627 मूल रूप से एचआईजी श्रेणी का डुप्लेक्स भवन है। आरोप है कि भवन में अलग-अलग फ्लैट तैयार करने की दिशा में निर्माण कार्य किया जा रहा है। इसी दौरान परिसर में बोरिंग कर भूजल का इस्तेमाल किए जाने को लेकर भी आपत्ति जताई गई।
मामले की जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचाए जाने का दावा किया गया है। इसके बाद भूगर्भ जल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बोरिंग का काम रुकवाया और नगर निगम की जलापूर्ति लाइन से पानी का कनेक्शन लेने के निर्देश दिए।
विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित बोरिंग के लिए निर्धारित नियमों के तहत अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी, तो लागू नियमों के अनुसार आगे क्या कार्रवाई की जाएगी, इस पर भी विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोकने और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। ऐसे में बोरिंग की अनुमति, भूजल के इस्तेमाल और संबंधित पक्ष को दिए गए निर्देशों का आधिकारिक विवरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
डुप्लेक्स में अलग-अलग फ्लैट बनाने की आशंका, जीडीए से जांच की मांग
मामले का दूसरा अहम पहलू भवन में कथित निर्माण बदलाव से जुड़ा है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि एचआईजी श्रेणी के डुप्लेक्स भवन को अलग-अलग फ्लैटों में तब्दील किया जा रहा है। इस संबंध में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
यदि भवन में स्वीकृत मानचित्र या लागू भवन उपविधियों के विपरीत निर्माण अथवा संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं, तो सक्षम प्राधिकरण द्वारा उनकी जांच की जानी चाहिए। स्थानीय लोगों की मांग है कि जीडीए की टीम मौके का निरीक्षण कर भवन के स्वीकृत मानचित्र और वर्तमान निर्माण की स्थिति का मिलान करे।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि भवन में अलग-अलग फ्लैट बनाने के लिए आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं। यदि किसी तरह का उल्लंघन सामने आता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
हालांकि, फिलहाल भवन में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक आदेश या जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए निर्माण की वैधता पर अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकरण की जांच और अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही निकाला जा सकता है।
नगर निगम के ट्रैक्टर और टैंकर की मौजूदगी पर भी स्पष्टीकरण की मांग
भवन के बाहर नगर निगम के नाम से एक ट्रैक्टर और टैंकर दिखाई देने की जानकारी भी सामने आई है। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं और वाहनों की मौजूदगी का उद्देश्य स्पष्ट करने की मांग की है।
हालांकि, इन वाहनों का इस्तेमाल किसी निजी निर्माण कार्य में किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। केवल किसी परिसर के बाहर सरकारी विभाग के नाम वाले वाहनों की मौजूदगी के आधार पर अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित वाहन वहां किस उद्देश्य से मौजूद थे, क्या वे किसी अधिकृत कार्य के लिए भेजे गए थे और उनके उपयोग से संबंधित कोई अभिलेख उपलब्ध है या नहीं। यदि वाहन विभागीय कार्य के लिए पहुंचे थे, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक किए जाने से अनावश्यक संदेह दूर हो सकता है।
पूरे मामले में अब तीन प्रमुख बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। पहला, बोरिंग और भूजल के इस्तेमाल को लेकर मिली शिकायतों पर नगर निगम तथा संबंधित विभागों ने क्या कार्रवाई की। दूसरा, मकान संख्या ए-627 का निर्माण स्वीकृत मानचित्र और लागू नियमों के अनुरूप है या नहीं।
तीसरा, भूगर्भ जल विभाग द्वारा बोरिंग रुकवाए जाने के बाद अनुमति और भूजल उपयोग के संबंध में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त नगर निगम के नाम वाले ट्रैक्टर और टैंकर की मौजूदगी के संबंध में भी आधिकारिक जानकारी सामने आनी चाहिए।
स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ मामले की निष्पक्ष जांच करें और तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करें।
फिलहाल भूगर्भ जल विभाग द्वारा बोरिंग का काम रुकवाए जाने की कार्रवाई सामने आई है, लेकिन भवन के निर्माण की वैधता, बोरिंग की अनुमति और अन्य शिकायतों पर संबंधित विभागों का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
अब देखना होगा कि नगर निगम और जीडीए मामले की जांच कर आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करते हैं या नहीं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं और ऐसी स्थिति में किस प्रकार की कार्रवाई आवश्यक है।
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Author: krjnews
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