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प्रवासी साहित्यकार तेजेन्द्र शर्मा के कहानी संग्रह ‘बेबसी की दास्ताँ’ और संपादकीय संग्रह ‘अपनी बात-खंड 6’ का लोकार्पण

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नई दिल्ली  : 5 / नवंबर / 2026 :   अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद एवं वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में प्रवासी भवन, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर सुप्रसिद्ध प्रवासी साहित्यकार डॉ. तेजेन्द्र शर्मा के दो साहित्यिक संग्रहों का लोकार्पण किया गया। अद्विक पब्लिकेशन से प्रकाशित कहानी संग्रह ‘बेबसी की दास्ताँ’ और पत्रिका ‘पुरवाई’ में लिखे गए संपादकीयों के संग्रह ‘अपनी बात-खंड 6’ का साहित्यकारों और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में विमोचन हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री कवि अशोक चक्रधर उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि लेखराज, नारायण कुमार और अनिल जोशी तथा विशिष्ट वक्ता प्रो. सत्यकेतु सांकृत ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन वैश्विक हिंदी परिवार, दिल्ली के अध्यक्ष ऋषि कुमार ने किया।

कार्यक्रम में डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहानी संग्रह ‘बेबसी की दास्ताँ’ की सराहना करते हुए कहा कि यह संग्रह केवल बेबसी की कहानियां नहीं, बल्कि उम्मीदों का कारवां भी है। उन्होंने लेखक के सूक्ष्म अवलोकन और कहानियों में प्रस्तुत मानवीय संवेदनाओं की प्रशंसा की। मुख्य अतिथि पद्मश्री अशोक चक्रधर ने कहा कि तेजेन्द्र शर्मा ऐसे प्रवासी लेखक हैं, जिन्हें भारत के पाठकों, साहित्यकारों, शिक्षण संस्थानों और शोधार्थियों से भरपूर स्नेह मिला है। उनकी कहानियों में छिपे शोध और विषयों की नवीनता पाठकों को प्रभावित करती है। उन्होंने ‘बेबसी की दास्ताँ’ को लेखक की एक नई और महत्वपूर्ण साहित्यिक उपलब्धि बताया।

प्रो. सत्यकेतु सांकृत ने कहा कि तेजेन्द्र शर्मा की कहानियां अपने नए विषयों और प्रस्तुति के कारण पाठकों के सामने एक अलग दुनिया तैयार करती हैं। ‘बेबसी की दास्ताँ’ विभिन्न रोगों और उनसे जुड़ी शारीरिक एवं मानसिक पीड़ाओं पर केंद्रित होने के बावजूद प्रेम, मानवीय करुणा और अपनेपन का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि लेखक ने बीमारी और मृत्यु के भय के बीच भी मानवीय रिश्तों की संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

पुस्तक की भूमिका लिखने वाले सूर्यकांत शर्मा ने इसे चिकित्सा विज्ञान, साहित्य और संस्कृति का अनूठा संगम बताया। उन्होंने कहा कि पुस्तक आज की युवा पीढ़ी के लिए भी महत्वपूर्ण है। वहीं डॉ. तेजेन्द्र शर्मा ने अपनी रचना प्रक्रिया, कहानियों के सृजन और पुस्तक को शोधार्थियों को समर्पित करने के विचार साझा किए। अनिल जोशी ने भी अपने अनुभवों के माध्यम से भावपूर्ण विचार रखे।

इस अवसर पर अद्विक प्रकाशन के अशोक गुप्ता ने पुस्तक के प्रकाशन से जुड़े अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में व्यंग्य यात्रा के संपादक प्रेम जनमेजय सहित देश-विदेश के अनेक साहित्यकार, शोधार्थी, विद्यार्थी और शिक्षाविद उपस्थित रहे। प्रो. गोपाल अरोड़ा, विनयशील चतुर्वेदी, डॉ. मुक्ति शर्मा, पीयूष श्रीवास्तव, डॉ. राजा राम यादव, शिव कुमार निगम, मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’, अनीता वर्मा और इला कुमार सहित अनेक साहित्य प्रेमियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। विदेश से डॉ. निखिल कौशिक, प्रो. किरण खन्ना, ऋतु ननन पाण्डेय, प्रो. सुषमा देवी, नीलिमा शर्मा, नीलिमा करैया और पद्मा मिश्रा सहित कई साहित्यकार ऑनलाइन जुड़े। कार्यक्रम में पुस्तकों पर सार्थक चर्चा के साथ साहित्य और रचनात्मकता को लेकर विचारों का आदान-प्रदान भी हुआ।

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Author: krjnews

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